गहलोत की राज्यसभा उम्मीदवारी के राजनीतिक अर्थ और भाजपा की अन्तर्कथा

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-निरंजन परिहार-
राजस्थान से भारतीय जनता पार्टी ने कद्दावर नेता राजेंद्र गहलोत को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है। राजेंद्र गहलोत केंद्रीय राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुत पुराने करीबी माने जाते हैं। और राजस्थान की राजनीति में वे अपने ही समाज के सबसे बड़े कांग्रेसी नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कट्टर विरोधी के रूप में जाने जाते हैं लेकिन विरोध की राजनीति में गहलोत ने गहलोत के खिलाफ कभी भी राजनीतिक व सामाजिक सम्मान की लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन नहीं किया।
गहलोत जोधपुर में सरदारपुरा सीट से दो बार विधायक और भैरोंसिंह शेखावत सरकार में मंत्री रहे। वे वसुंधरा राजे की सरकार के दौरान यूआईटी के चेयरमैन भी रहे। वर्तमान में राजस्थान प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष है और चुनाव समिति के अध्यक्ष भी रहे है। राजस्थान से राज्यसभा के लिए गहलोत की उम्मीदवारी इस बात का सबूत है कि भाजपा आमतौर पर अपने पुराने कर्मठ लोगों को भूलती नहीं है। गहलोत लंबे समय से पार्टी के लिए चुपचाप काम करते रहे तो उनकी सेवाओं का सम्मान करते हुए पार्टी ने राज्यसभा में भेजने की तैयारी की है। वैसे घर उसको राज्यसभा का टिकट मिलने के अंतर्गत है यह है कि राजस्थान में वे कई दिग्गज नेताओं को दरकिनार करते हुए उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़े हैं तो इसके पीछे केंद्र के बड़े नेताओं के प्रति उनकी निष्ठा और पार्टी के प्रति समर्पण का भाव ही सबसे महत्वपूर्ण रहा है। और तथ्य यह भी है कि राजस्थान भाजपा में कोई भी मन से नहीं चाहता था कि राज्य में गहलोत राज सभा के उम्मीदवार हो क्योंकि कई बड़े दिग्गज और प्रभावशाली नेता इस एकमात्र सीट की उम्मीदवारी की आस पाले हुए थे लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी नज़दीकियों के कारण राजेंद्र गहलोत सबसे आगे निकल गए।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी जोधपुर में सरदारपुरा के, राजेंद्र गहलोत भी वहीं के और दोनों एक ही समाज से। दोनों मैं आमने-सामने चुनाव भी लड़ा और राजेंद्र गहलोत कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक गहलोत से दोनों बार हार गए लेकिन इस एक कि हार और दूसरे की जीत की तसवीर में दोनों ने आपस में एक दूसरे के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाई। जोधपुर ही नहीं समूचे राजस्थान में इसी कारण अशोक गहलोत और राजन गहलोत दोनों को अपने समाज में अपने राजनीतिक कद में फर्क होने के बावजूद बराबरी का सम्मान प्राप्त है। भाजपा ने गहलोत की टक्कर में गहलोत को ताकत देकर ओबीसी कोअपने साथ जोड़े रखने की कोशिश भले ही कि हो। लेकिन दोनों गहलोत अपने समाज की ताकत और तासीर दोनों से बेहतर वाकिफ है। मुंबई के प्रवासी राजस्थानी समाज में गहलोत की उम्मीदवारी से ख़ुशी की लहर। गहलोत का प्रवासी राजस्थानी में जबरदस्त प्रभाव है।

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