राष्ट्रीय महिला दिवस पर यह संदेश समस्त नारियों के नाम

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नारी विधाता की सर्वोत्तम और नायाब हस्ती है। इसकी ना  कोई सरहद है और ना ही कोई छोर। नारी भावी जीवन की जननी है जो बच्चों के जन्म से ही उनका पालन पोषण करते हुए उनमें संस्कारों का बीजारोपण कर सद्गुणों का उच्चतम विकास करती है।जो बीज बड़ा होकर वृक्ष बनकर हमेशा मीठे फल और  छाया प्रदान करता है यह मानने में कोई आपत्ति नहीं होगी कि एक नारी की गोद में भविष्य पहली सांस लेता है।
आज की नारी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यदि नई पीढ़ी को धार्मिक संस्कार व नैतिकता की शिक्षा का पाठ नहीं पढ़ाया गया तो वह सब कुछ हम अपनी आंखों से स्वयं देखेंगे नई पीढ़ी को संस्कार देना निहायत जरूरी है यदि संस्कार की जड़ें मजबूत होगी तो आधुनिकता की आंधी नई पीढ़ी के इस वटवृक्ष को कभी भी धराशाई नहीं कर सकेगी यह काम मूल रूप से मां का होता है मां का अर्थात नारी नारी का मुख्य तीन रूप है एक लक्ष्मी दूसरा सरस्वती और तीसरा दुर्गा नारी अपने परिवार को सुचारू रूप से चलाने के लिए लक्ष्मी का रूप धारण करें संतान को संस्कार संपन्न बनाने के लिए एवं शिक्षित करने के लिए सरस्वती बन जाए और सामाजिक बुराइयों को ध्वस्त करने के लिए सीधा आरूढ़ होकर दुर्गा बन दिखाएं मां तो वह है जो संस्कारों का बीजा रोपण करती है लेकिन आज नारी अपनी शक्ति भूल गई है वह अपनी ही जाति की दुश्मन बन बैठी है।
मत भूलो नारी श्रम, क्षमता, बलिदान, साहस और आत्मा बल की जीती जागती तस्वीर होती है । एक महिला एक नारी एक स्त्री जो पुरुष की जन्म दायिनी और जीवन की निर्मात्री है वह त्याग समर्पण और विसर्जन की घुट्टी पीकर मानवता का विकास करती है । नारी  के बिना मनुष्य जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती । जिस प्रकार तार के बिना वीणा का और धूरी के बिना रथ का कोई अस्तित्व नहीं होता ।उसी प्रकार एक महिला के बिना संस्कारों की कल्पना ही नहीं की जा सकती। नारी जीवन का एक-एक क्षण व पल कीमती है।
नारी का जीवन तो श्रेष्ठ है ही, पर इस जीवन को सावधानी पूर्वक जीना एक कला है। जिस स्त्री ने इसे जान लिया है, उसका यह जीवन सरल व स्वरस बन जाता है। समाज और देश के लिए आदर्श बनता है।

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