कश्मीर मसला सुलझ गया तो पाकिस्तानी आर्मी की फंडिंग रुक जाएगी:अदनान सामी

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मुंबई:2016 में पाकिस्तान से भारत के नागरिक बने अदनान सामी की मानें तो दोनों के बीच अगर कश्मीर मसला सुलझ जाएगा तो पाकिस्तानी आर्मी की फंडिंग रुक जाएगी। यह बयान उन्होंने हिन्दी समाचार पत्र दैनिक भास्कर से बातचीत में दिया। वे अपने हालिया रिलीज सिंगल ‘तू याद आया’ के प्रमोशन के सिलसिले में बात कर रहे थे, जो मंगलवार को रिलीज हुआ है।
कश्मीर मुद्दा उठाने के लिए पाक आर्मी को मिलता है फंड: अदनान
अदनान कहते हैं- कश्मीर जैसे मुद्दों को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच हमेशा तनाव रहता है। दोनों देशों के बीच शान्ति कायम क्यों नहीं हो पा रही है? इसका जवाब 60-70 सालों से ढूंढा जा रहा है, जो सियासत से ज्यादा आर्मी में छुपा हुआ है। खासकर पाकिस्तानी आर्मी में। क्योंकि उन्हें तो कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए फंड्स मिलते हैं।
जिस दिन कश्मीर का मसला सुलझ जाएगा, उस दिन उनकी फंडिंग रुक जाएगी। अगर आप घटनाक्रमों को समझने की कोशिश करें तो पाएंगे कि जब-जब राजनेताओं ने, दोनों मुल्कों की सरकारों ने अमन कायम करने कई कोशिश की, तब-तब कहीं न कहीं अटैक हुए हैं। कभी कारगिल हो जाता है। कभी पुलवामा हो जाता है। ऐसा क्यों होता है? साधारण सी बात है कि पाकिस्तानी आर्मी नहीं चाहती कि कश्मीर का मसला खत्म हो।
सीएए को लेकर भी बोले अदनान
अदनान ने इस बातचीत में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर भी बात की। वे कहते हैं – सीएए का भारतीय नागरिकों से कोई ताल्लुक ही नहीं है। इसका ताल्लुक तो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के उन अल्पसंख्यकों से है, जो यहां आकर रिफ्यूजी बनकर रह रहे हैं। जो धार्मिक तौर पर प्रताड़ित हुए हैं। उनके लिए नागरिकता हासिल करने के लिए यह एक किस्म का तरीका इजाद किया गया है कि उनको 11 साल इंतजार न करना पड़े। उन मुल्कों में वे वापस जा नहीं सकते, क्योंकि वहां से प्रताड़ित हैं। तो फिर वे जाएं किधर? उन जैसों के लिए सीएए एक किस्म की सहूलियत है।
यह बात तो सच है कि मुस्लिम इन तीनों कंट्रीज में अल्पसंख्यक नहीं हैं। वे वहां बहुसंख्यक हैं। धर्म के नाम पर उनकी प्रताड़ना नहीं हो रही है। फिर भी अगर उन मुल्कों से कोई मुसलमान यहां आता है और जो नागरिकता पाने की नॉर्मल प्रक्रिया को पूरा करता है तो भारत भारत सरकार उसे नागरिकता देगी ही। सरकार यह तो नहीं कह रही है कि हम नागरिकता देंगे ही नहीं।
1952 का जो सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट है, उसके तहत यह लिखा हुआ है कि कोई भी दूसरे देश का इंसान, वह चाहे जिस भी मजहब का हो एक प्रक्रिया को फॉलो करते हुए अप्लाई कर सकता है। 11 साल की मियाद को पूरा करने के बाद नागरिकता मिल सकती है। नागरिकता हासिल करने की यह प्रक्रिया बहुत पुरानी है। चलती आ रही है। मैंने भी इन सारे क्राइटेरिया को पूरा किया और मुझे भी भारत की नागरिकता मिली। आगे भी जो कोई भी इसी प्रोसेस के जरिए नागरिकता हासिल कर सकता है। ऐसा कतई नहीं है कि इस पर किसी किस्म के बदलाव हुए हैं।

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