फिल्म रिव्यूः प्रेम व विस्थापन के दर्द की अभिव्यक्ति है ‘शिकारा’

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कश्मीर घाटी से पंडितों के विस्थापन को बारीकी से दिखाती फिल्म ‘शिकारा’ सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो चुकी है। फिल्म का मेरे जैसे तमाम लोगों को बड़ी बेसब्री से इंतजार था। वजह ‘शिकारा’ को लेकर विधु-विनोद चोपड़ा की तारीफ काफी पहले से की जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने बड़ी ही ईमानदारी से कश्मीरी पंडितों के दर्द और इस मामले के दूसरे पहलुओं पर भी प्रकाश डाला है। फिल्म में आदिल खान और सादिया मुख्य भूमिका में हैं जबकि फिल्म का निर्देशन विधु विनोद चोपड़ा ने किया है।

कहानीः फिल्म की शुरुआत जम्मू के एक कैंप से होती है जहां कश्मीरी पंडित शिवकुमार धर (आदिल खान) और उनकी पत्नी शांति धर (सादिया) रहती हैं और उन्हें राष्ट्रपति भवन से बुलावा आता है क्योंकि वे राष्ट्रपति को अक्सर कश्मीरी पंडितों की समस्याओं को लेकर खत लिखते रहते हैं। उसके बाद उनकी प्रेम कहानी की शुरुआत होती है जिसमें वे कश्मीर में अपने परिवार के साथ रहते हैं, प्रेम होता है, अपने मुस्लिम दोस्त के हाथ प्रेम पत्र भेजते हैं, शादी होती है, सभी हंसी-खुशी शादी में शरीक होते हैं। सभी एक दूसरे के दुख-दर्द में साथी रहते हैं, लेकिन एक दिन अचानक शिवकुमार धर के मुस्लिम दोस्त के पिता की गोली लगने पर मौत हो जाती है। वहीं से उनका वह दोस्त जो हमेशा सुख-दुख में साथ रहता है बंदूक उठा लेता है और कहता है कि हमारे अब्बा को सरकार ने मारा है। उसके बाद पूरे कश्मीर में दंगे शुरु हो जाते हैं, पैंपलेट चिपका दिए जाते हैं कि पंडित कश्मीर छोड़कर चले जाएं। कश्मीरी पंडित कश्मीर छोड़कर जाने लगते हैं, इसी बीच शिवकुमार धर के एक भाई की दंगाईयों की गोली से मौत हो जाती है। फिल्म शिव और शांति के प्रेम कहानी के केंद्र में आगे बढ़ती है। फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि पाकिस्तान की तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो किस तरह से कश्मीरी मुसलमानों को भड़का रही हैं और वहां लोगों के घर जलाए जा रहे हैं। पूरी फिल्म दोनों की प्रेम कहानी और उनके घर छोड़ने की पीड़ा को बयां करती हुई आगे बढ़ती है । बंदूक उठाने के बाद भी शिवकुमार धर व उनके मुस्लिम दोस्त के बीच कितना फासला आया है, इतना जुल्म के बाद भी शिवकुमार शांति का संदेश क्यों देते हैं, शिवकुमार धर द्वारा राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखने पर उनका जवाब आता है या नहीं, आखिर क्यों कश्मीरी पंडितों पर इतने जुल्म हुए, और बाद में क्या हुआ यह सब जानने के लिए एक बार फिल्म देखने जरूर जाएं।
अभिनय, डायरेक्शन व संगीतः पूरी फिल्म शिवकुमार धर व शांति सिप्रू के इर्द-गिर्द घूमती है और उनका किरदार निभाया है आदिल और सादिया ने। दोनों ने बेहद नपा-तुला अभिनय किया है, जो काफी प्रभावित करती है। बाकी के कलाकारों ने भी अपने किरदार को बखूबी निभाया है। विधु विनोद चोपड़ा का निर्देशन भी शानदार बन पड़ा है। उन्होंने पंडितों के कैंप व कुछ कश्मीर में शूटिंग किया है इसलिए फिल्म में काफी प्रामाणिकता झलकती है। फिल्म के संगीत भी बेहद अच्छे बन पड़े हैं।
कुल मिलाकर फिल्म ने कश्मीरी पंडितों के दर्द को बयां करने की अच्छी कोशिश है, इनमें वह कामयाब हुए हैं या नहीं इसे कश्मीरी पंडितों पर ही छोड़ा जाना चाहिए क्योंकि असल में दर्द को वही समझ सकता है, जिस पर बीती हो।

सुरभि सलोनी की तरफ से ‘शिकारा’ को 4 स्टार।

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