आत्मा में धर्म का स्पर्श होना चाहिए: साध्वी जिनरेखा जी

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वाशी (नवी मुम्बई)। शासन श्री साध्वी श्री जिनरेखाजी के सानिध्य में पर्युषण महापर्व का सातवां दिवस ध्यान दिवस मनाया गया इस दिवस की मंगल शुरुआत कोपरखैरणे की महिला मंडल ने सुंदर प्रस्तुति दी।किसी भी उत्तम पर्व की सार्थकता तभी हैओ जभं अपनी आराधना,प्रार्थना साधना और त्याग तपस्या से अपने मन को पवित्र और पावन कर सकते है। जब तके जीवन मे धर्म के प्रति श्रद्धा और नियम लेने की मन स्तिथि नही है,तब तक व्यक्ति पाप परवर्तियों से छुटकारा पा नही सकता। नियम भलेही साधारण अथवा छोटा हो उसको धारण करने से व्यक्ति बुरी परवर्तियों से अपने को बचाने में आफल हो सकते है। नमस्कार महामंत्र का स्मरण करने से बुरी शक्तियां हमारे पास नही आ सकती है। जब से अंतर में रहे हुए मैल मिटते है।और भावों की शुद्धता से ही मन की पवित्रता सहज रूप से परिलक्षित होने लगती है। साध्वी मधुर्यशा ने कहा ध्यान है मन का शून्य हो जाना,जैसे पानी कपड़ो में लगे मैल को पक्षालित करता है उसे साफ करता है। आग लोहे के जंग को गलाकर दूर कर देती है। वैसे ही ध्यान से कर्म रूपी कचरे को जीव से अलग कर डालता है।
सभा अध्यक्ष संपतजी बागरेचा, दिनेशजी हिरण, अमृतलालजी खांटेड, बाबुलालजी बाफना, अर्जुनजी सिंघवी,केशरीमलजी गादिया,अमरचंदजी बरलोटा, और महिला मंडल सहसंयोजिका रेखाजी कोठारी कि विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम को सफल बनाने मे तेयुप अध्यक्ष रंजीत खांटेड, मंत्री अर्जुन सोनी, पवन परमार, कोषाध्यक्ष जितेंद्र बाफना, प्रवीन चौरडिया, नितेश बाफना राहुल चोरडिया, अमित आंचलिया, महावीर बाफना, विनोद बाफना, धर्मबोध कोठारी, राकेश चंडालिया पुखराज संचेती सुरेश बाफना सुनील मेहता अनिल प्रकाश मादरेचा सुनील बोहरा अरविंद चोरडिया हरिश गादिया गणपत गुंदेचा हिम्मत कोठारी सुरेश मोटावत राजू कावड़िया प्रकाश संचेती कमलेश सिंयाल निर्मल चपलोत निर्मल सिंघवी लक्ष्मीलाल गोखरू प्रकाश चोरडिया दिलीप दुग्गड़ गणपत बाफना हस्तीमल बाफना का सहयोग रहा।तेयुप अधयक्ष रंजीत खांटेड ने सभी का आभार प्रकट किया।कार्यक्रम का कुशल संचालन सुशील मेडतवाल ने किया।यह जानकारी तेयुप सायोजक पंकज चंडालिया ने दी।

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