एनआईए को सौंपा जाएगा दविंदर सिंह का मामला, “उन्हें कोई बहादुरी पदक नहीं दिया गया”

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नयी दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जल्द ही जम्मू कश्मीर के निलंबित पुलिस उपाधीक्षक दविंदर सिंह का मामला अपने हाथ में लेगी। अधिकारियों ने बुधवार को यहां यह जानकारी दी। सिंह को पिछले हफ्ते दक्षिण कश्मीर में दो आतंकवादियों के साथ पकड़ा गया था। अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी द्वारा मामले को हाथ में लिए जाने के पहले जम्मू और राष्ट्रीय राजधानी में जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजों और अलगाववादियों के बीच सांठगांठ को तोड़ने का श्रेय एनआईए को दिया जाता है।
सिंह और तीन अन्य से शुरुआती पूछताछ के दौरान केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में तैनात एनआईए के कुछ सदस्य मौजूद थे। तीन अन्य लोगों में प्रतिबंधित संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का स्वयंभू जिला कमांडर नावेद, उसका सहयोगी आतिफ अहमद और वकील इरफान अहमद मीर शामिल थे।
अधिकारियों ने जम्मू में कहा कि जांच एजेंसी द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद सभी रिकॉर्ड एनआईए को सौंप दिए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि माना जाता है कि उन्होंने दोनों आतंकवादियों को चंडीगढ़ ले जाने और कुछ महीने तक उनके रहने की व्यवस्था के लिए 12 लाख रुपये लिए थे।
बता दें कि पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) दविंदर सिंह को कुलगाम जिले के मीर बाजार में शनिवार को गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त वह एक कार में दो आतंकियों नवीद बाबा और अल्ताफ को ले जा रहे थे।
दविंदर की गिरफ्तारी के बाद इस तरह की खबरें थीं कि उन्हें राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जा चुका है। इस बीच जम्मू कश्मीर पुलिस ने ट्वीट कर कहा, ‘यह स्पष्ट किया जाता है कि डीएसपी दविंदर सिंह को गृह मंत्रालय से कोई बहादुरी पदक नहीं दिया गया था, जैसा कि कुछ मीडिया संस्थानों और लोगों ने खबरें दी हैं। उन्हें केवल 2018 के स्वतंत्रता दिवस पर पूर्व जम्मू कश्मीर राज्य द्वारा उनकी सेवा के लिए बहादुरी पदक दिया गया था।’

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