अंधेरी पहुंचे आचार्य शिवमुनि का भव्य स्वागत, 4 को पहुंचेंगे मेवाड़ भवन गोरेगांव

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मिथ्या को तोड़ें, खुद को जानें, आत्मा को पहचानें: आचार्य शिवमुनि जी
संगीता अनिल परमार/मुम्बई। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के आचार्य शिवमुनि जी महाराज साहब, प्रमुख मंत्री शिरिषमुनि जी आदि ठाणा मंगलवार, 3 दिसंबर को प्रातः 8 बजे अंधेरी पश्चिम में पहुंचे जहां यहां के जैन समाज द्वारा आचार्य भगवंतों का भव्य स्वागत किया गया। इससे पहले आचार्यप्रवर यहां के नवनिर्मित स्थानक में पहुंचे।
इस मौके पर समस्त जैन समाज के प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में पहुंचकर जैन एकता का परिचय दिया। बताते चलें कि आचार्य शिवमुनि जी का 23 वर्षों बाद मुम्बई में पदार्पण हुआ है।
आचार्य शिवमुनि के अंधेरी प्रवेश पर स्वागत हेतु समाज की महिलाएं लाल बांधनी साड़ी पहने सिर पर कलश लिए हुए थीं तथा पुरुष सफेद परिधान एवं सिर पर राजस्थानी साफ़ा पहनकर चल रहे थे, जिससे यहां का माहौल पूरी तरह धर्ममय बन गया।
लगभग साढ़े 10 बजे यहां के जेपी रोड पर स्थित श्री चन्द्रप्रभु जैन उपाश्रय में पहुंचे आचार्य शिवमुनि जी आदि संतो का सर्वप्रथम महिला मंडल द्वारा स्वागत गीत “जय जय शिवाचार्य भगवान…” के माध्यम से स्वागत किया। तत्पश्चात रुचिरा सुराणा एवं अंधेरी महिला मंडल ने मायानगरी के किरदारों पर आधारित सुंदर नाटिका पेश किया। जिसमें गुरु वचनों से जीवन परिवर्तन का बेहद मार्मिक संदेश था। चन्द्रप्रभ जैन देरासर के पदाधिकारियों ने अंधेरी उपसंघ का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया।
आचार्य शिवमुनि जी महाराज ने अपने प्रवचन का अमृत वर्षा करते हुए फरमाया कि महावीर स्वामी की साधना, उनके जीवन संदेशों को समझना जरूरी है। हमारा परम् सौभाग्य हैं कि महावीर का धर्म मिला, जैन परिवार में जन्मे। इससे हम आप कई बुरे कर्मो से बच गए। महावीर स्वामी ने कहा है कि आप पहले खुद को जानें, क्योंकि आप राजा महाराजा बन जाएं, धन दौलत कमा लें, महल बनवा लें लेकिन खुद को नहीं जाना तो सब बेकार है। आप परिवार के लिए घर बनाएं, दौलत बनाएं, संघ के लिए सब करें परंतु अपनी आत्मा के लिए संयम, साधना जरूर करें, क्योंकि यही मोक्ष दिलाता है। खुद से सवाल करें कि मैं क्या हूँ, कौन हूँ, जो कर रहा हूँ किसके लिए कर रहा हूँ। इसलिए खुद को जानिये कि मैं सिर्फ शरीर नहीं हूँ, आत्मा हूँ। आत्मा स्वयं में सम्पन्न है। आत्मा का रूप रंग नहीं, वह कुछ खाती-पीती नहीं, लेकिन केवल्य ज्ञान आत्मा में ही है। मिथ्या को तोड़ें और खुद को जानें। जिन्होंने खुद को जाना वे मोक्ष गए।
आचार्य श्री से पूर्व शिरीष मुनि ने अपने प्रवचन में कर्मभूमि अंधेरी का जिक्र किया अपने संयम लेने और आचार्य शिवमुनि जी की महिमा का बखान किया। उन्होंने बताया कि तृष्णा का कोई अंत नहीं है, इसलिए संयम, ध्यान, साधना के माध्यम से जीवन को सफल बनाना चाहिए। गुरुदेव सभी को ध्यान साधना सिखाते हैं।
इस अवसर पर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष किशन परमार, मेवाड़ भवन के अध्यक्ष दिलीप नाबेड़ा सहित उप संघ अंधेरी के शान्तिलाल लोढा, मोहनलाल पोखरना, बस्तीमल बोकड़िया, ख्यालीलाल बडाला, जसवंत कोठारी, भगवती बडाला, हरकलाल लोढा, रूपलाल बदामा, हिम्मत बदामा, हिम्मत वागरेचा, मुकेश सिंघवी, संजीव सिंघवी, पंकज चंडालिया, सुनील पोखरना, मदनलाल लोढा, प्रकाश लोढा, अम्बालाल सिंघवी, संपत तातेड़, वसन्त कोठारी, अमृत कोठारी, तेरापंथ समाज से धर्मचंद परमार, ललित परमार, तरुण श्रीश्रीमाल, राजेन्द्र बाफना, अनिल परमार, गोरेगांव संघ के अध्यक्ष कांतिलाल बडाला, मंत्री विनोद चपलोत, हिम्मत कंटालिया सहित महिला मंडल अंधेरी, नवयुवक मंडल अंधेरी एवं दिगंबर समाज, मूर्तिपूजक जैन संघ, तेरापंथ समाज के बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ मुम्बई के निवर्तमान अध्यक्ष चतरलाल लोढा ने किया।

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