मधुबाला, मीना कुमारी, इंदिरा गांधी जैसी पर्सनालिटीज का बायोपिक करना चाहती हैं कृति सेनन

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कृति सेनन एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी आने वाली फिल्म ‘पानीपत’ रिलीज होने वाली है और वह इन दिनों फिल्म का प्रमोशन काफी जोर-शोर से कर रही हैं। आशुतोष गोवरिकर की फिल्म ‘पानीपत’ में कृति मराठा योद्धा सदाशिव राव भाऊ की पत्नी पार्वती बाई का किरदार निभा रही हैं। फिल्म के सिलसिले में पिछले दिनों दिए इंटरव्यू में कृति ने कई बातें संवाददाताओं से शेयर किए जिनमें उन्होंने कहा कि वह कई महिला पर्सनालिटी का किरदार निभाना चाहती हैं, जिनमें मधुबाला, मीना कुमारी तथा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी प्रमुख हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ना तो ऐसा कोई किरदार अभी तक उन्हें ऑफर हुआ है न ही वह ढूंढ़ रही हैं।
बरेली की बरफी, हीरोपंती, लुकाछिपी तथा हाउसफुल-4 जैसी फिल्मों मे अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकी कृति का कहना है कि ‘पानीपत’ में उनका किरदार काफी चैलेंजिंग है, इसके लिए उन्होंने तलवारबाजी, घुड़सवारी तथा मराठी भाषा व हाव-भाव पर काफी मेहनत की। बताते चलें कि यह फिल्म पानीपत के तीसरे युद्ध पर बेस्ड है जो 1761 में माराठा साम्राज्य सदाशिव राव भाउ व अफगानिस्तान के अहमद शाह अब्दाली के बीच पानीपत के मैदान में हुआ था। फिल्म में अर्जुन कपूर व संजय दत्त मुख्य भूमिकाओं में हैं। संजय दत्त अहमद शाह अब्दाली का किरदार निभा रहे हैं जबकि अर्जुन कपूर सदाशिव राव भाऊ के रूप में नजर आएंगे तथा कृति उनकी पत्नी पार्वती बाई का महत्वपूर्ण रोल कर रही हैं। ‘पानीपत’ 6 दिसंबर को रिलीज होगी।
कृति ने संवाददाताओं से बातचीत में फिल्म के किरदार को लेकर कहा कि पार्वती बाई काफी स्ट्रांग महिला थीं, उनका किरदार निभाकर मुझे काफी अच्छा लग रहा है। इस बात को लेकर उन्होंने आशुतोष गोवरिकर की तारीफ की कि उनकी फिल्मों में महिलाओं का किरदार कमजोर नहीं होता, उनके किरदार काफी प्रेरणादायी होते हैं। कृति बताती हैं कि ‘पानीपत’ में पार्वती बाई का किरदार निभाने से पहले मैंने उनके बारे में सर्च करना शुरू किया तो उसमें मुझे सिवाय बेसिक जानकारी के कुछ नहीं मिला। फिल्म में मेरे लिए इतिहास की किताब आशु सर ही थे। मेरे लिहाज से वे इतिहास की किसी भी किताब से ज्यादा बेहतर हैं। वे कहती हैं पार्वतीबाई के किरदार में कई रंग हैं। वह एक सामान्य लड़की होने साथ ही शरारती थीं, खुले विचारों वाली थीं, खुल्लमखुल्ला अपने प्यार का इजहार करती थीं। उनका कैरेक्टर बहुत इंट्रेस्टिंग है। उस जमाने में वे काफी आगे का सोचती थीं। बेहद समझदार थीं।
इस सवाल के जवाब में कि आप अपने और पार्वती बाई में कितना समानता देखती हैं? कृति कहती हैं कि उस समय पार्वती बाई का भी मानना था कि लड़कियां लड़कों से कम नहीं हैं, मैं भी वही सोचती हूं। कोई कह दे कि लड़की होकर ऐसा क्यों कर रही हो, तो मैं बिल्कुल सीधा जवाब देती हूं, यह चीज उस जमाने में पार्वती बाई में थी। वे खुद को पुरुषों से कम नहीं समझती थीं, हां उनके जैसा मैं प्यार का इजहार नहीं कर सकती।

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