राह पकड़ ले एक, चलाचल पा जाएगा मधुशाला

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कवि हरिवंश राय बच्चन की मशहूर कविता, “मधुशाला” की पंक्ति -‘राह पकड़ ले एक, चलाचल पा जाएगा मधुशाला’ , हमें सफलता के लिए काफी कुछ इशारा करती है। अक्सर हम अपने काम को लेकर दूसरों से सलाह लेते रहते हैं और सलाह बदलने के साथ ही अपना काम भी बदलते रहते हैं। कई बार तो यह बदलाव सिर्फ इसलिए होता है कि आपका मन नहीं लगता या काम में मुश्किलें आ रही हैं। इसका नतीजा यह होता है कि हम कामयाब नहीं हो पाते। मगर सही तरीका यह है कि आप मन न लगने या कार्य कठिन होने की वजह से बदल दें। बल्कि आपने जिस क्षेत्र को अपनी मर्जी से चुना है उसके शिखर तक पहुंचना ही आपका लक्ष्य होना चाहिए। इसलिए ही भले ही आपको रात दिन एक  करना पडे़। क्योंकि किसी भी नदी की गहराई उसके किनारे से नहीं नापी जा सकती। उसके लिए तो आपको गहरे पानी में ही उतरना होगा। इसी ध्येय को आसान शब्दों में बयां करती एक कहानी पढ़िए आगे-

 

एक बार एक किसान को कुआं खोदना था। कोई 15-20 फुट खोद दिया गया, लेकिन पानी नहीं मिला। किसी ने सलाह दी कि यहां से कुछ दूर पानी हो सकता है। किसान ने वहां खुदवाना शुरू किया। 15-20 फुट खोद दिया गया, लेकिन यहां भी पानी नहीं मिला। फिर किसी और के कहने पर तीसरी जगह भी कोशिश की गई, लेकिन परिणाम कुछ भी नहीं मिला। उस गांव के बूढ़े अनुभवी से पूछा गया। उसने भी जगह बताई और वहां भी 15-20 फुट खोद दिया गया। वहां भी पानी नहीं था।

संतों से पूछा गया। स्कूल टीचर से पूछा गया। डॉक्टर से पूछा गया। महात्माओं से पूछ लिया गया। जिसने भी जगह बताई सब जगह 15-20 फुट खोदकर देख लिया गया, लेकिन पानी नहीं मिला। फिर वो किसान थक गया और हारकर बैठ गया कि इतनी मेहनत के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है, करूं तो क्या करूं।

घर आए थके-हारे किसान से उसकी पत्नी ने परेशानी का कारण पूछा। उस किसान ने कहा, हर किसी से सलाह लेकर जहां-जहां लोगों ने बताया 15-20 फुट खुदवाया गया लेकिन कहीं भी पानी नहीं मिला। तो उसकी पत्नी ने कहा कि घर के बाहर जहां सबसे पहले खुदवाया था, वहीं पर और ज्यादा खुदवाओ। किसान ने यह बात मानते हुए उसी पहले वाले कुएं को खोदना शुरू किया। 15 फुट, 20 फुट, 25 फुट, 30 फुट, 35 फुट। आखिर पानी मिल गया। इसी को कहते हैं राह पकड़ ले एक, चलाचल पा जाएगा मधुशाला।

 

काम की बात:
कई बार सफलता मिलने में समय लगता है। ऐसे में अगर आप बेचैन होकर इधर-उधर भटकने लगेंगे और किसी के कहे पर बिना अपना दिमाग लगाए काम करने लगेंगे, तो सफलता आपसे और भी दूर हो जाएगी। इससे अच्छा तो यह है कि आप जो कर रहे हैं उसी में लगातार बेहतर करने का प्रयास करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी।

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