आत्मानुशासन जीवन मे आएं: आचार्यश्री महाश्रमण

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12 किमी का विहार कर शांतिदूत का रामनगर पदार्पण, शांतिदूत ने की दुःखमुक्ति के सूत्रों की व्याख्या

14-11-2019, गुरुवार , रामनगर, कर्नाटक। चरैवेति-चरैवेति सूत्र को सार्थक करते हुए अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमण जी का आज बिरदी से प्रभात वेला में मंगल विहार हुआ। लगभग 12 किमी का विहार कर पूज्यप्रवर रामनगर स्थित श्री शंखेश्वर धाम तीर्थ में पधारें। यहाँ पर धर्म सभा में पावन देशना प्रदान करते हुए आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा – सभी प्राणियों को दुःख का भय लगता है। दुख कोई नहीं चाहता। साधना के द्वारा दुख से मुक्ति पायी जा सकती है। क्योंकि मोक्ष एक ऐसा स्थान है जहां दुख नहीं होता। दुख मुक्ति के लिए स्वयं के निग्रह की साधना करनी चाहिए। अपने आप का संयम करना चाहिए।
आचार्यवर ने आगे कहा कि जीवन मे अनुशासन आये यह आवश्यक है। शरीर का अनुशासन करे, संयम करे। वाणी का, मन का एवं इन्द्रियों का संयम करना चाहिए। स्वयं को अनुशासन रखकर दुखों से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। हमारे जीवन में संयम रहेगा तो दुख भी कम रहेंगे। आचार्यवर ने कथा के माध्यम से प्रेरणा देते हुए कहा कि व्यक्ति गुस्सा, छल-कपट से दूर रहे। अहंकार न करें। मन की चंचलता मिट जाए तो आत्मानुशासन हो जाता है।
सायंकाल लगभग पांच किमी का विहार कर महातपस्वी महाश्रमण जी पटेल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सल पब्लिक स्कूल एंड पी.यू. कॉलेज, रामनगर में पधारे।

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