दक्षिण मुम्बई में देखो प्रेक्षाध्यान के दर्पण में’ जैन विद्या कार्यशाला

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मुंबई। साध्वी कैलाश वतीजी के सानिध्य में जैन विद्या का सम्मान सम्मारोह रखा गया जिसमें साध्वी श्री कैलाशवतीजी ने कहा पढमं णाणं तयोदया विद्या उर्जित करके ही व्यक्ति अच्छा आचरण कर सकता डिग्री के साथ ज्ञान होना आवश्यक है। विद्या का सम्यक अर्थ है अपनी स्वयं की पहचान हो जिसे अपनी पहचान हो जाती है, वह वास्तिवक में ज्ञानी है जो अपने आपको जान लेते है। फिर भी एक श्रावक श्राविका को नो तत्व एवं छठ्ठ जीवनीकाय का ज्ञान तो होना ही चाहिए।
छ द्रव्य की जानकारी पुरे विश्व की सत्ता का आयना है जो परीक्षा देकर आप परीक्षा में उत्तीर्ण हुए है वह अपनी पुस्तकों का अध्ययन करते रहे जिस से ज्ञान पक्का रहेसाध्वी पंकजश्रीजी ने परीक्षा में उत्तीर्ण होने वालों को ज्ञान राशि को कैसे बड़ाए प्रेरणा देते हुवे कहा अपने आप को देखना सीखें प्रेक्षाध्यान अनुप्रेक्षा के द्वारा हम अपनी मेघा को बढ़ा सकते है जो व्यक्ति शुभचिन्तन की बार बार अनुप्रेक्षा करता है वह शत्रु को भी मित्र बना सकते है।
जैन विद्या एक ऐसी विद्या है जो मानसिक भावनात्मक भावों के ग्राक को ऊंचा उठाती है में ऐसा सोचती हूं जो व्यक्ति 25 बोल के थोकडे को पुरा समझकर खोलकर धारण करता है वह श्रावक की नींव मोक्ष की टिकट सम्यक्त्व को प्राप्त कर लेता है जैन विद्या प्रमाण पत्र का वितरण तेयुप परिषद एवं जैन विद्या प्रभारी सरला कोठरी के द्वारा ही व्यवस्थित रखा गया साध्वी श्री शारदा प्रभा ने कहा विद्या की देवी को स्थापित करने के लिए ह्रदय के मंदिर में शांति व पॉजिटिव सोच का झाडू लगाकर मैत्री व संतोष की अग्रंति जलाएं। साध्वी ललिता श्री जी एवं साध्वी श्री सम्यक्त्वयशा जी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
किशनलाल डागलिया, इंदरमल धाकड़, गणपत डागलिया, मनोज चोरडिया, सुखलाल सिंयाल, दनेश धाकड़, मांगीलाल धाकड़, बंशीलाल धाकड़, पवन बोलिया, राहुल मेहता, नितेश धाकड़, अशोक बर्लोटा, प्रदीप ओस्तवाल,उत्सव धाकड़, अशोक धींग, महावीर ढेलरिया, सरला कोठारी, रेणु डागलिया, उर्मिला कच्छारा, नुतन सोनी उषा बाफना आदि उपस्थित थे।

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