पालघर में मनाया आचार्य भिक्षु का 217 वाँ चरमोत्सव

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सत्य को समर्पित सच्चे संत थे आचार्य भिक्षु: मुनि जिनेशकुमार

पालघर। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनीश्री जिनेशकुमारजी ठाणा-2 के सान्निध्य में तेरापंथ के संस्थापक आचार्य भिक्षु के 217 वे चरमोत्सव के अवसर पर त्रिदिवसीय भावांजलि अर्पण कार्यक्रम की आयोजना जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा पालघर द्वारा की गई।
चरमोत्सव के मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए मुनिश्री जिनेशकुमारजी ने कहा- कुछ व्यक्ति शील संपन्न होते हैं, श्रुत संपन्न नहीं होते। कुछ व्यक्ति श्रुत संपन्न होते हैं, शील संपन्न नहीं होते। कुछ व्यक्ति शील संपन्न भी होते हैं श्रुत संपन्न भी होते हैं। कुछ व्यक्ति न शील सम्पन्न होते है और न ही श्रुत संपन्न होते हैं।आचार्य भिक्षु शील सम्पन्न भी थे और श्रुत सम्पन्न भी थे। वे शुद्ध आचार के कट्टर पक्षधर व ज्ञान के सागर थे। वे सहज सरल विनम्र थे। वे तेरापंथ के संस्थापक थे। वे व्यक्ति ही नही विचार थे। वे सत्य को समर्पित सच्चे संत थे। उनकी जिनवाणी के प्रति अगाध श्रद्धा थी। उन्होंने धर्मसंघ को दीर्घजीवी बनाने के लिए, नवीन संघ का समुचित संरक्षण के लिए तीन काम विशेष रूप से किये। जिसमे मूल्यों की स्थापना, संघ, संगठन व साहित्य सृजन मुख्य है। आचार्य भिक्षु तब भी महान थे अब भी महान है। आचार्य भिक्षु ने जीवन भर लोगो को सम्यक ज्ञान बांटा। वे अप्रमत्त, अनाग्रही, परिषहजयी व साधना प्रिय थे। जीवन के संध्याकाल में उन्होंने सिरयारी में सात प्रहर के अनशन में भाद्रपद शुक्ला त्रयोदशी को महाप्रयाण कर उन्होंने अपने सार्थक जीवन और सार्थक मृत्यु का अलौकिक संदेश प्रदान कर दिया। आज उनके चरणों मे भावांजलि अर्पित करते है।
इस अवसर पर मुनि परमानंदजी ने कहा – आचार्य भिक्षु महान साधक एवं तत्व चिंतक थे। वे जीतने गंभीर थे उतने ही विनोद प्रिय थे। उन्होंने भगवान महावीर के दर्शन को यथार्थ रूप मे प्रस्तुत कर जिनः शासन की महान सेवा की।
पूरे समाज की और से तेरापंथ सभा अध्यक्ष नरेशजी राठौड़ ने आचार्य भिक्षु को भावांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल द्वारा भिक्षु अष्टकम के मंगल संगान से हुआ। चरमोत्सव के अवसर पर “ओम भिक्षु” का तेरह घंटे का जप किया गया।
त्रिदिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत आचार्य भिक्षु संस्मरण प्रस्तुति कार्यक्रम व आचार्य भिक्षु प्रश्न मंच कार्यक्रम का सुंदर आयोजन हुआ। जिसमे अच्छी संख्या में श्रावक श्राविकाओं ने भाग लिया।
मुनीश्री जिनेश कुमारजी ने तीनो दिन आचार्य भिक्षु के कर्तुत्व एवं व्यक्तित्व पर प्रवचन कर जनता को उनकी विशेषताओ से परिचित कराया। यह जानकारी दिनेश राठौड़ ने दी।

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