सेना प्रमुख जनरल रावत चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की दौड़ में सबसे आगे

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नई दिल्ली: रक्षा सेनाओं के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस नियुक्त करने की घाेषणा के साथ ही कयास तेज हो गए हैं कि इतिहास रचने का मौका किसे मिलेगा। इस पद पर पहली नियुक्ति के लिए थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत का नाम सबसे आगे है। फिलहाल वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ तीनों सेना प्रमुखों में सबसे सीनियर हैं। इस हैसियत से वह तीनों सैन्य प्रमुखों की समिति के अध्यक्ष भी हैं।

धनोआ सीनियर, सितंबर में रिटायर होंगे; इनके बाद रावत का ही नंबर

धनाेआ सितंबर में रिटायर हाेंगे। इसके बाद जनरल रावत सबसे सीनियर हो जाएंगे। उनका कार्यकाल दिसंबर 2019 तक है। सीडीएस की नियुक्ति की सिफारिश रक्षा मंत्रालय की समिति करेगी। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कैबिनेट की नियुक्ति समिति इस पर अंतिम मुहर लगाएगी। सीडीएस की व्यवस्था बनते ही चेयरमैन चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी का पद खत्म हो जाएगा। अभी तीनों सेना प्रमुखाें में से सबसे सीनियर काे यह पद मिलता है। सीडीएस की रिपाेर्टिंग रक्षा मंत्री और पीएम के नेतृत्व वाली रक्षा मामलाें की कैबिनेट कमेटी काे हाेगी। सूत्रों के अनुसार सीडीएस का पद बनाने पर पीएमओ, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटरिएट और रक्षा मंत्रालय के बीच दो महीने से विमर्श चल रहा था। नए सेनापति के अधीन संयुक्त सामरिक सिद्धांत की भी रूपरेखा तैयार की जाएगी।

थलसेना: जनरल बिपिन रावत

जनरल बिपिन रावत दिसंबर 1978 में कमीशन ऑफिसर (11 गोरखा राइफल्स) बने। वह 31 दिसंबर 2016 से थलसेना प्रमुख हैं। करीब साढ़े चार महीने बाद रिटायर होंगे। पूर्वी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा, कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर में कामकाज का अनुभव रहा।

नौसेना: एडमिरल करमबीर सिंह

एडमिरल करमबीर सिंह जुलाई 1980 में कमीशन ऑफिसर बने। वह 31 मई 2019 से नौसेना प्रमुख हैं। वह नवंबर 2021 में रिटायर होंगे। तीनों सेना प्रमुखों में सबसे कम उम्र के हैं। सेना प्रमुखों का कार्यकाल तीन साल या 62 साल की उम्र (जो भी पहले आए) तक होता है।

वायुसेना: एयर मार्शल बीरेंद्र सिंह धनोआ

एयर मार्शल बीएस धनोआ जून 1978 में कमीशन ऑफिसर बने। वह 1 जनवरी 2017 से वायुसेना प्रमुख हैं। अगले महीने रिटायर होंगे। एयर मार्शल धनोआ 1 जून 2019 से तीनों सेना प्रमुखों की समिति (सीओएससी) के चेयरमैन भी हैं।

इंदिरा मानेकशॉ को सीडीएस बनाना चाहती थीं, तो मतभेद उभरे
थलसेना में केएम करियप्पा और सैम मानेकशॉ को फील्ड मार्शल की रैंक दी गई थी। कहा जाता है कि 1971 के युद्ध के बाद तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी मानेकशॉ को फील्ड मार्शल की रैंक देकर सीडीएस बनाना चाहती थी। तब वायुसेना-नौसेना प्रमुखों के मतभेद उभरे थे। उनका तर्क था कि इससे वायुसेना और नौसेना का कद घट जाएगा। हालांकि, मानेकशॉ को फील्ड मार्शल रैंक देने पर सहमति बनी। सैम जून 1972 में रिटायर होने वाले थे। रैंक देने के लिए उनका कार्यकाल 6 महीने बढ़ाया गया। जनवरी 1973 में उन्हें यह रैंक दी गई।

सीडीएस 4 स्टार वाला अफसर ही माना जाएगा

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ काे 4 स्टार वाला अधिकारी ही माना जाएगा। उनका दर्जा तीनों सेना प्रमुखों के बराबर होगा। हालांकि, वह अपने समकक्षाें में प्रथम हाेंगे। रक्षा मंत्रालय सीडीएस की भूमिका का रोडमैप तैयार करने में लगा हुआ है। पूरी संभावना है कि सीडीएस का स्तर रक्षा सचिव के बराबर ही होगा। लेकिन सैन्य सलाह के मामले में रक्षा सचिव के बजाय सीडीएस की बात काे तरजीह मिलेगी।

नई ट्राई सर्विसेज की कमान भी सीडीएस काे

  • साइबर, स्पेस व स्पेशल ऑपरेशन की ट्राई सर्विसेज की कमान भी सीडीएस काे मिलेगी। भविष्य में तीनों सेनाओं की साझा कमान दी जाएगी। हालांकि, परमाणु कमान स्ट्रेटेजिक फोर्स कमांड के पास रहेगी, जो पीएमओ के अधीन है।
  • सीडीएस को तीनों सेनाओं के संयुक्त अभ्यास और ट्रेनिंग का जिम्मा भी सौंपा जाएगा।
  • रक्षा खरीद का जिम्मा भी सीडीएस को मिल सकता है। आपेरशनल मामलों में सेना प्रमुखों की ही भूमिका रहेगी।

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