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आंचलिक ‘ओजस’ ऊर्जा कार्यशाला में निखरा नया तेज

महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ठाणा-6 के पावन सान्निध्य में ‘ओजस’ कार्यशाला सानंद संपन्न हुई। तेरापंथ महिला मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती कुमुद कच्छारा के नेतृत्व में यह खान्देश की पहली कार्यशाला अत्यंत उपादेय रही। अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के तत्त्वावधान में तेरापंथ महिला मंडल धुलिया द्वारा यह कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला का प्रारंभ नमस्कार महामंत्र के समुह सस्वर जाप से हुआ। धुलिया– महिला मंडल ने मंगल संगान प्रस्तुत किया। कार्यशाला के उद्घाटन की उद्घोषणा राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमुदजी ने की और कार्यशाला के प्रथम सत्र का शुभारंभ हुआ।
प्रथम सत्रः उजास
उपस्थिति संभागियों को सम्बोधित करते हुए विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्री जी ने कहा- जब नींद आए तब अँधेरा भी सुहाता है पर जागनेवालों की पहली अपेक्षा है-प्रकाश। जीवन में शक्ति और शांति दोनों का अपना महत्व है। ज्ञान के खजाने को भरें और शांति को प्रकट करें। श्रद्धा का ओज प्रकट करना है।
इतने छोटे से क्षेत्र में ऐसा अपूर्व उपक्रम राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमुदजी की श्रद्धा की ही अभिव्यक्ति है।
साध्वीश्री डॉ योगक्षेमप्रभाजी ने अपने संयोजकीय वक्तव्य में कहा- ओजस स्वयं से स्वयं का संधान है। ओजस शक्ति जागरण का अभियान है। ओजस एक प्रस्थान है तेज बढ़ाने के लिए। आज अभातेममं के राष्ट्रीय नेतृत्व की अध्यक्षता में खान्देश में नए जागरण का उपक्रम प्रारंभ हुआ। है । कार्यशाला के अध्यक्षीय संभाषण में श्रीमती कुमुद जी कच्छारा ने कहा- पूज्य गुरुदेव के असीम आशीर्वाद की परिणति है, आज की यह कार्यशाला। साध्वीश्री जी प्रबृद्धता समता -क्षमता की त्रिवेणी है। आज धुलिया में हम अपने ओजस को प्रकट करने के उपायों की चर्चा कर रहे हैं। सभी बहनें MBBSS बनना है। कैसे बनेंः इसकी उन्होंने पूरी प्रक्रिया समझाई। साध्वी लावण्यप्रभाजी ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए ‘ओजस’ जगाने की प्रेरणा दी। अभातेममं की ट्रस्टी एवं पूर्व अध्यक्ष शांता जी पुगलिया ने कहा –गुरुदेव तुलसी ने हमें वह मंच दिया, जिसने हमारी अस्मिता को नया आयाम दिया। हम नया करने की सोचें व करणीय की दिशा में प्रस्थान करें। उन्होंने ” कुरजा ” ,पक्षी के उदाहरण से संघ भावना की महत्ता प्रतिपादित की ।-” ओजस “-संगान के पश्चात तेरापंथ महिला मंडल से संगीता सूर्या ,तेयुप से दिनेश जी जैन व सभा से सुरजमलजी सूर्या ने सबका भाव पूर्ण स्वागत किया। साध्वी लावण्यप्रभाजी ,साध्वी कुंदनयशाजी , साध्वी मुदितप्रभाजी एवं साध्वी मधुरप्रभाजी ने “ओजस” गीत की स्वर लहरी से पूरा माहौल ओजस मय बना दिया। श्रीमती खुशबू सेमलाणी ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर साध्वीश्री योगक्षेमप्रभाजी ने ज्योति जागे : शक्ति जागे”
चार कलर के कार्डस से रोचक एक्टीविटी करवाई। जिसमें करीब 50बहनों ने भाग लिया। तीन कार्डस के साथ मंजुषा डोशी ” जलगांव ” प्रथम रही ।-मंच संचालन साध्वीश्री योगक्षेमप्रभाजी ने अत्यंत कुशलतापूर्वक किया।
द्वितीय सत्र-ऊर्जा
सत्र का प्रारंभ ” ओजस ” गीत से मनमाड़ महिला मंडल द्वारा हुआ। राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमुदजी कच्छारा ने ” संस्था ” की वैधानिक गतिविधियों रजिस्टर आदि के व्यवस्थापन व अभातेममं की मुख्य गतिविधियों की जानकारी देते हुए बड़े ही रोचक ढंग से मार्गदर्शन किया ।ट्रस्टी शांताजी पुगलिया ने ” संगोष्ठी कैसे करें ” अधिवेशन आदि में संभागिता आदि अनेक संगठन मूलक उपयोगी विषयों की व्याख्या की।-श्रीमति रेखा घुंडियाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। विदुषी साध्वीश्री जी के प्रेरणा -पाथेय के साथ कार्यशाला परिसम्पन्न हुई। साध्वीश्री ने ओजस्वी शब्दों में ” आज ” जो पाया है उसे चारों ओर फैलाने की प्रेरणा दी। साध्वीश्री योगक्षेमप्रभाजी ने एक्टीविटी का परिणाम घोषित करते हुए उससे कैसे ज्ञान ,दर्शन ,चारित्र और तप मे विकास हो यह बताया । तेरापंथ महिला मंडल, धुलिया द्वारा उपस्थिति के लिए मनमाड़ व जलगांव मंडल व प्रतियोगिता के लिए मंजुषा डोशी को मोमेंटो प्रदान किया गया। इस अवसर पर डॉ .श्रद्धा गेंलडा़ का BDS. करने पर साहित्य व तप के लिए अभिनंदन पत्र से सम्मान किया गया। इस कार्यशाला की सफल समायोजना में महिला मंडल की बहनों का सक्रिय योगदान रहा। विशेष रूप से श्री नानकरामजी तनेजा, श्री सुरजमल जी सूर्या, विनोद जी घुंडियाल, दिनेश जी सूर्या, संजय जी सूर्या व राजेन्द्र जी घुंडियाल का सहयोग रहा। इस कार्यशाला में जलगांव, साक्री, शाहदा, मनमाड़, दोडा़ईचा, अमलनेर, नाशिक आदि क्षेत्रों की बहिनों ने भाग लिया। कार्यशाला अत्यंत सफल रही।

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