आर्म्स एक्ट मामले में आरोपी कुलदीप सेंगर समेत तीन पुलिसवालों के खिलाफ आरोप तय

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नई दिल्ली:दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में कथित मौत के मामले में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर और अन्य के खिलाफ मंगलवार को आरोप तय किए। जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने पीड़िता के पिता को 2018 में सशस्त्र अधिनियम के तहत आरोपी बनाने और उन पर हमला करने के मामले में सेंगर और अन्य के खिलाफ आरोप तय किए। इस मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं।
इस मामले में कुलदीप सिंह सेंगर के अलावा माखी पुलिस थाने के तत्कालीन प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया, सब-इंस्पेक्टर कामता प्रसाद सिंह, कॉन्स्टेबल आमिर खान, बाहुबली विधायक कुलदीप के भाई अतुल सिंह सेंगर समेत चार अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। अब सभी आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के झूठे मामले में फंसाने के मामले में केस चलेगा और सीबीआई के चार्जशीट के मुताबिक गवाहियां होंगी।
बढ़ती ही जा रही हैं कुलदीप की मुश्किलें
उन्नाव रेप मामले में बीते शुक्रवार को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने ही बीजेपी के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के खिलाफ रेप, पॉक्सो, अपहरण की धाराओं में आरोप तय किए थे। इससे पहले कोर्ट की ओर से जारी प्रोडक्शन वारंट के बाद कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में पेश किया गया था जिसके बाद कोर्ट ने सेंगर को तिहाड़ जेल भेज दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पांच मामले में से रोड एक्सिडेंट को छोड़कर बाकी चार मामले को तीस हजारी कोर्ट में ट्रांसफर किए गए थे। ये 5 केस जिला जज धर्मेश शर्मा की कोर्ट में ट्रांसफर हुए हैं। तीस हजारी कोर्ट को 45 दिन में ट्रायल पूरा करना है।
आपको बताते हैं इस केस में कब क्या हुआ-
4 जून 2017: उन्नाव की एक नाबालिक लड़की ने आरोप लगाया कि उसका बीजेपी के विधायक कुलदीप सेंगर के घर पर बलात्कार किया। पीड़िता ने कहा कि वह अपने एक पड़ोसी के साथ नौकरी दिलाने में मदद के लिए विधायक के पास गई थी।
11 जून 2017: इसके बाद रेप पीड़िता गायब हो गई। परिवार वालों ने पुलिस में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
20 जून 2017: रेप पीड़िता औरैया के एक गांव से मिली। उसे अगले दिन उन्नाव लाया गया।
22 जून 2017: पुलिस ने पीड़िता को कोर्ट में पेश किया और सीआरपीसी के सेक्शन 164 के तहत उसका बयान रिकॉर्ड कराया गया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बयान में विधायक का नाम नहीं लेने दिया।
3 जुलाई 2017: 10 दिन बाद पीड़िता को उसके परिवारवालों को सौंप दिया गया। पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर वह दिल्ली चली गई। इसके बाद उसने मुख्यमंत्री दफ्तर और वरिष्ठ पुलिस अफसरों को शिकायत भेजी। इसमें उसने विधायक और उसके भाई अतुल सिंह के खिलाफ रेप केस दर्ज कराने की मांग की।
24 फरवरी 2018: पीड़िता की मां ने उन्नाव के चीफ जूडिशल मजिस्ट्रेट कोर्ट का रुख किया और सीआरपीसी के सेक्शन 156 (3) के तहत एफआईआर दर्ज कराने की मांग की।
3 अप्रैल 2018: कोर्ट ने पीड़िता की मां की अर्जी पर सुनवाई की। इस सुनवाई में लड़की का परिवार भी शामिल हुआ था। इसी शाम, लड़की के पिता को कथित तौर पर अतुल सिंह और उसके सहयोगी मक्खी ने बुरी तरह पीटा। लड़की के पिता को पुलिस को सौंप दिया गया, उन्होंने सेक्शन 25 के तहत मामला दर्ज कराया।
5 अप्रैल 2018: मेडिकल एग्जामिनेशन के बाद लड़की के पिता को जेल भेज दिया गया। लड़की के पिता ने आरोप लगाया कि उसे फंसाया जा रहा है और विधायक के भाई ने उसे बुरी तरह पीटा। उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
8 अप्रैल 2018: इसके बाद पीड़िता ने एमएलए के खिलाफ एफआईआर की मांग करते हुए लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह करने की कोशिश की।
9 अप्रैल 2018: जिला कारागर से शिफ्ट करने के कुछ ही घंटों बाद जिला अस्पताल में लड़की के पिता की मौत हो गई। इसके बाद 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया और मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया गया। पुलिस ने पीड़िता के पिता के साथ मारपीट करने के आरोप में 4 लोगों को गिरफ्तार किया। ये सभी विधायक कुलदीप सेंगर के सहयोगी थे।
10 अप्रैल 2018: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया कि युवती के पिता के शरीर पर 14 जगह चोट के निशान थे।
11 अप्रैल 2018: उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस को यह केस सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।
12 अप्रैल 2018: मामला सीबीआई को सौंपा गया और विधायक कुलदीप सेंगर को नाबालिग से रेप का आरोपी बनाया गया।
13 अप्रैल 2018: कुलदीप सेंगर को सीबीआई ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। साथ ही नई एफआईआर दर्ज की गई। उसे एक हफ्ते की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
11 जुलाई 2018: सीबीआई ने पहली चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कुलदीप सेंगर का नाम था।
13 जुलाई 2018: दूसरी चार्जशीट फाइल की गई, जिसमें पीड़िता के पिता को कथित तौर पर फंसाने के मामले में कुलदीप सेंगर, उनके भाई, तीन पुलिसकर्मी और 5 अन्य लोगों का नाम शामिल था।
8 अगस्त 2018: उन्नाव गैंगरेप केस में एक गवाह की संदिग्ध हालात में मौत हुई। उसके बाद बिना पोस्टमार्टम जल्दबाजी में उसे दफना दिया गया।
28 जुलाई 2019: रेप पीड़िता को ट्रक ने मारी टक्कर। मौसी और चाची की हुई मौत।

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