तीर्थयात्रियों ने पवित्र झील के किनारे हवन किया, चीन ने कहा- यह हमारा क्षेत्र, नियम का पालन करें

0
16

गंगटोक:सावन महीने के अंतिम सोमवार को हिंदू तीर्थयात्रियों ने कैलाश मानसरोवर झील के किनारे हवन-पूजन किया। कैलाश पर्वत चीन के तिब्बत स्वशासी क्षेत्र में स्थित है। इस दौरान अली प्रीफेक्चर के डिप्टी कमिश्नर जी किंगमिन ने कहा कि भारतीय तीर्थयात्री हमारे क्षेत्र में आते हैं। ऐसे में उन्हें हमारे नियम-कानूनों का पालन करना चाहिए। अगर हम भारत जाएंगे तो वहां के नियमों का ध्यान रखेंगे।

‘भारत यात्रियों की सुविधाओं का ध्यान रखे’
किंगमिन ने कहा, ‘‘चीन कैलाश मानसरोवर आने वाले भारतीय यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखता है। भारत सरकार को भी अपनी तरफ के इलाके में यात्रियों की सुविधा के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना चाहिए। हमें उम्मीद है कि भारत सरकार अपने तरफ की सड़क सुधारेगी। यात्रियों को लिपुलेख (उत्तराखंड) से आने में 4-5 दिन लगते हैं। इसमें काफी समय और ऊर्जा लगती है।’’

‘‘अली प्रीफेक्चर की सरकार यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का हर तरह से ध्यान रखती है। यात्रियों को तकलीफ न हो, इसलिए हमने रास्ता ठीक रखने में काफी पैसा खर्च किया है।’’

‘सावन सोमवार के मौके पर यज्ञ किया’
बैच 13 के संपर्क अधिकारी सुरिंदर ग्रोवर ने बताया- हमारा जत्था 30 जुलाई को दिल्ली से रवाना हुआ था। हमने कैलाश की परिक्रमा पूरी की। इसके बाद मानसरोवर झील के किनारे यज्ञ किया। कल सावन का अंतिम सोमवार और कार्तिक मास परितोष तिथि थी, इसलिए यज्ञ करना शुभ था।

हर साल जून से सितंबर के बीच होती है यात्रा
हिंदू मान्यतानुसार, कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। बौद्ध मानते हैं कि बुद्ध इसी क्षेत्र में अपनी मां रानी महामाया के गर्भ में आए थे। जैनों का मानना है कि उनके पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव को कैलाश के पास अष्टपद पर्वत पर मोक्ष मिला था।

भारतीय विदेश मंत्रालय हर साल जून से सितंबर के बीच कैलाश मानसरोवर की यात्रा कराता है। इसमें हिंदू, बौद्ध और जैन तीर्थयात्री शामिल होते हैं। इसके लिए चीन सरकार से वीजा लेना होता है। कैलाश मानसरोवर जाने के दो रास्ते हैं। एक उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रा और दूसरा सिक्किम में नाथू ला दर्रा होकर जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)