125 साल बाद सावन सोमवार के दिन बना है नाग पंचमी का योग

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सावन का सोमवार 17 जुलाई से शुरू हो चुका है और आज सावन का पहला सोमवार है. सावन के पहले सोमवार के दिन नाग पंचमी का शुभ संयोग बन रहा है. धर्म ग्रंथों में सावन के महीने को बहुत ही उत्तम और पुण्य मास कहा गया है. इसमें भी सावन के सोमवार का महत्व सबसे अधिक है और आज नाग पंचमी का योग होने का कारण इस सोमवार का महत्व और बढ़ गया है.

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, ऐसा 125 सालों बाद हो रहा है, जब सावन के पहले सोमवार के दिन नाग पंचमी का योग पड़ा है. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, नाग देवता की पूजा करते समय नाग देवता के मंत्र का कम से कम 11 बार जप जरूर करना चाहिए- ”ओम नवकुलाय विद्महे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प प्रचोदयात”. धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र के जप से सर्प दंश का भय दूर होता है और धन-धान्य में वृद्धि होती है.

पूजा से खत्म होगा कालसर्प दोष
धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक अगर किसी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष हो तो उसे नागपंचमी के दिन भगवान शिव और नागदेवता की पूजा करनी चाहिए. इस पर्व पर प्रमुख नाग मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और भक्त नागदेवता के दर्शन व पूजा करते हैं. मान्यता है कि जो भी इस दिन श्रद्धा व भक्ति से नागदेवता का पूजन करता है उसे व उसके परिवार को कभी भी सर्प भय नहीं होता.

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