इंडियन नेवी को 2022 तक मिल सकते हैं अडवांस्ड तलवार युद्धपोत

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कालिनिग्राड:भारतीय नौसेना को 2022 तक पहले दो अडवांस्ड तलवार क्लास युद्धपोत मिल सकते हैं। पेमेंट की क्लीयरेंस के बाद रूस का यांटार शिपयार्ड युद्धपोत का निर्माण कर देगा। नए युद्धपोत के लिए कॉन्ट्रैक्ट पिछले साल अक्टूबर में साइन किया गया था। इनके डिजाइन पर काम शुरू हो गया है। इन युद्धपोत में से दो यांटार शिपयार्ड और दो गोवा शिपयार्ड बनाएंगे। इन युद्धपोत में देश में बने सतह पर निगरानी रखने वाले रेडार और ब्रह्मोस ऐंटी शिपिंग और लैंड अटैक मिसाइल लगी होंगी।
यांटार शिपयार्ड के जनरल डायरेक्टर एफिमोव एडुअर्ड ने बताया, ‘यांटार शिपयार्ड योजना के अनुसार, 2022 तक भारतीय नौसेना को दो युद्धपोत की डिलिवरी करेगा। हम गोवा शिपयार्ड में बनने वाले युद्धपोत में भी मदद करेंगे। हम इसके लिए पूरी तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएंगे।’ उन्होंने कहा कि कार्य शुरू करने के लिए अडवांस पेमेंट इस महीने आने की संभावना है और इस वर्ष के अंत तक शिप में लगाई जाने वाली गैस टरबाइन भी भारत से मिल सकती हैं।
पिछले साल 95 करोड़ डॉलर में हुई थी डील
भारत ने रूस में बनने वाले दो युद्धपोत के लिए पिछले वर्ष अक्टूबर में 95 करोड़ डॉलर की डील की थी। इसके बाद गोवा शिपयार्ड के साथ बाकी के दो युद्धपोत के लिए 1.2 अरब डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया गया था। रूस में बनने वाले युद्धपोत की कॉस्ट कम होने का कारण यह है कि यांटार शिपयार्ड ने पहले ही एक रद्द हो चुके ऑर्डर के लिए जहाज के दो ढांचे तैयार किए थे, जिन्हें अब ट्रांसफर किया जा रहा है।
गोवा शिपयार्ड को भी कार्य शुरू करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और टेक्नॉलजी ट्रांसफर की जरूरत होगी। युद्धपोत पर 22 स्वदेशी सिस्टम लगाए जाने हैं। इनमें नेविगेशन सिस्टम, वैपन और सेंसर शामिल हैं। एडुअर्ड ने बताया, ‘हमारे आकलन के आधार पर, गोवा शिपयार्ड कॉन्ट्रैक्ट शुरू करने के लिए तैयार है और हम इस वर्ष के अंत या अगले वर्ष की शुरुआत में वहां अपने तकनीकी विशेषज्ञ भेजेंगे।
2022 तक डिलिवरी का भरोसा
यांटार शिपयार्ड को 2022 तक युद्धपोत की डिलिवरी देने का विश्वास है। हालांकि, शिपयार्ड में जहाजों के ढांचे पर गैस टर्बाइन फिट करना, सभी सिस्टम लगाना और केबल बिछाना जैसा काफी कार्य बाकी है।
इनमें से दो युद्धपोत बनाने का कॉन्ट्रैक्ट शुरुआत में देश के प्राइवेट सेक्टर को देने पर विचार किया गया था लेकिन सरकार ने बाद में सरकारी कंपनी गोवा शिपयार्ड को इनका ऑर्डर देने का फैसला किया। नौसेना पहले ही इसी क्लास के छह युद्धपोत ऑपरेट कर रही है लेकिन नए युद्धपोत अधिक मॉडर्न होंगे। इनमें भारत में बने बहुत से इक्विपमेंट लगे होंगे।

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