त्याग से सजाएं जीवन की झांकी, सुनहरे धागों की राखीः साध्वी कैलाशवती जी

भायंदर। ‘राखी का लगा मेला, भायंदर में साध्वियों के द्वारा’ आज भायंदर तेरापंथ भवन में शासनश्री साध्वी कैलाशवती जी ने हाजरी का वाचन करते हुए, मर्यादा व अनुशासन में रहने का संकल्प कराया। साध्वी श्री जी ने कहा कि कल रक्षा बंधन है आज से ही राखी बंधन का क्रम शुरू हो गया है। इन सुनहरे धागों में प्रेम की सुगंध बड़ी तेजी से भारत देश में फैल रही है। आज का पर्व रक्षा का पर्व है। यह राखी का त्यौहार कैसे चला। एक बार दानव व मानवों में झगड़ा हो गया। इंद्र की सूझबूझ ने विष्णु के द्वारा बलि से तीन पत्र भूमि मांगकर पूरे देवताओं के उपद्रव से उभारा। विष्णु ने दो पैरों में धारा व गगन को मापा लेकिन तीसरा पग कहां रखें। इतिहास बताता है कि विष्णु बलि के सिर पर रखा और उसे पाताल लोक का राजा बनाया और इंद्र व सुरों की रक्षा की। विष्णु भगवान ने उसी दिन देवताओं ने विष्णु भगवान के मौली बांधकर देवताओं की रक्षा करने का संकल्प लिया।
साध्वी पंकज श्री जी ने अध्यात्म राखी बांधकर अपनी आत्मा को त्याग तपस्या की राखी बांधने की प्रेरणा दी। साध्वी ललिताश्री जी एवं साध्वी सम्य्कत्वयशाजी ने गीतिका प्रस्तुत की। तेयुप के अध्यक्ष विनोद जी डांगी ने श्रावक निष्ठा का वाचन किया। सभा अध्यक्ष व मंत्री भी इस मौके पर उपस्थित रहे। संगीता वरलोटा, संगीता बोहरा, निधि सांखला, नीशु दुग्गड एवं राजीव घीया, कुलदीप लोढ़ा ने मधुर स्वरों द्वारा ‘भाई तेरा ही इंतजार है, बहिना भाई खड़ा तेरा द्वार’ की सुंदर प्रस्तुति देते हुए पूरे वातावरण को राखीमय बना दिया। साध्वी शारदाप्रभाजी ने आगम का उपदेश दिया और राखी बंधवाने के लिए प्रेरित किया।

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