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लंदन में राहुल ने साधा मोदी सरकार पर निशाना, कहा – सामाजिक न्याय तभी संभव है जब लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत किया जाए

लंदन। कांग्रेस अध्यक्ष जर्मनी के बाद ब्रिटेन के दौरे पर हैं जहां वह मोदी सरकार पर लगातार हमला बोल रहे हैं। लंदन के स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) में बोलते हुए राहुल ने कहा कि देश में रोजगार बड़ी समस्या है, और पहले इसे स्वीकार करना होगा, लेकिन सरकार इसको स्वीकार नहीं कर रही।
उन्होंने कहा, ‘मैं विभिन्न समुदायों के पास जाना पसंद करता हूं। एक सामान्य भारतीय किसान किसी कृषि विशेषज्ञ से ज्यादा ज्ञान रखता है।’ सामाजिक न्याय के मामले पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं सरकार को अधिकार देने वाले के तौर पर देखता हूं। सामाजिक न्याय केवल तभी संभव है जब लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत किया जाए।’
उन्होंने कहा कि मुख्य बात यह है कि युवा होने के नाते आपको देखना चाहिए कि जो लोग आपसे असहमत हैं, वो कहां से आ रहे हैं। भारत अपने अहिंसक विचारों और उन लोगों के प्रति सहानुभूति दिखाने की क्षमता रखता है जो हमसे सहमत नहीं हैं, ये हमारी संस्कृति का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, ‘मैं काफी हद तक हिंसा का सामना किया है। उन अनुभवों ने मुझे लोगों के प्रति दयालु बना दिया। मैं उन लोगों के प्रति सहानुभूति महसूस करता हूं जो कमजोर और सताये हुए होते हैं।’
राहुल गांधी ने कहा, ‘मैं अर्थव्यवस्था, समाजशास्त्र और राजनीति को अलग-अलग नहीं देखता। ये सब एक प्रक्रिया है जो एक साथ काम करती है। भारत में इस प्रक्रिया ने 100 वर्षों में 1.3 अरब लोगों को बदल दिया।’ रोजगार पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत में रोजगार की बड़ी समस्या है और भारत सरकार इसे मान नहीं रही है। चीन जहां एक दिन में 50 हजार नौकरियां दे रहा है, वहीं हमारे यहां एक दिन सिर्फ 450 नौकरियां दी जा रही हैं। यह एक आपदा की तरह है। देश में रोजगार बड़ी समस्या है, और पहले इसे स्वीकार करना होगा, लेकिन सरकार इसको स्वीकार नहीं कर रही।’
राहुल गांधी ने अगले साल होने वाले आम चुनाव के बारे में बोलते हुए कहा कि अगला चुनाव बेहद सीधा है। एक तरफ बीजेपी है और दूसरी तरफ हर विपक्षी दल है। इसका कारण ये है कि, पहली बार भारतीय संस्थानों पर हमला किया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने ब्रिटिश संसद के एक कमरे का जिक्र करते हुए कहा कि ब्रिटिश संसद में एक सज्जन ने एक कमरा दिखाया, जहां से कभी भारत को चलाया जाता था। आज वहां 10-12 भारतीय सांसद हैं जो उसी कमरे से ब्रिटेन की मदद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘हम भारतीय संविधान पर हो रहे हमले से बचाव कर रहे हैं। मैं और पूरा विपक्ष इस बात पर सहमत है कि हमारी पहली प्राथमिकता जहर को फैलाने से रोकना है।’ संसद में बहस के गिरते स्तर पर उन्होंने कहा कि 50 और 60 के दशक में संसद में बहस की गुणवत्ता अधिक थी, लेकिन यदि आप भारतीय संसद में आज बहस का स्तर देखेंगे तो इसकी गुणवत्ता में कमी आई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सांसदों के पास कानून बनाने की शक्ति नहीं है। राफेल सौदे पर बोलते हुए राहुल ने कहा कि देश का सबसे बड़ा रक्षा ठेका, राफेल सौदा अनिल अंबानी को दिया गया जिनके ऊपर 45,000 करोड़ रुपये का कर्ज था और उन्होंने अपने जीवन में कभी कोई विमान नहीं बनाया।
उन्होंने कहा, ‘मैंने प्रधानमंत्री जी को संदेश भेजा है कि जिस दिन वो महिला आरक्षण विधेयक पारित कराना चाहते हैं, पूरी कांग्रेस पार्टी खुशी से बीजेपी का सहयोग करेगी।’
इससे पहले राहुल गांधी ने लंदन स्थित थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाए। लोगों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी के लिए डोकलाम विवाद एक इवेंट है।
गांधी ने कहा कि डोकलाम कोई अलग मुद्दा नहीं है। यह एक के बाद एक कई घटनाओं का हिस्सा था। यह एक प्रक्रिया थी। प्रधानमंत्री मोदी डोकलाम को महज एक इवेंट के रूप में देखते हैं। अगर उन्होंने ध्यान से पूरी प्रक्रिया को देखा होता, तो वो इसे रोक सकते थे। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह हकीकत है कि डोकलाम में आज भी चीन की मौजूदगी है।
इस दौरान राहुल गांधी ने पाकिस्तान को लेकर भी पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान को लेकर पीएम मोदी के पास कोई गहराई से सोची-समझी रणनीति नहीं है। पाकिस्तान के साथ बातचीत करना बहुत मुश्किल है, क्योंकि वहां कोई भी ऐसी संस्था नहीं है, जो सर्वोच्च हो। हम तब तक प्रतीक्षा करेंगे, जब तक कि वो कोई सुसंगत ढांचा नहीं बनाते हैं।’
राहुल गांधी ने कहा, ‘भारत पिछले 70 वर्षों से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। लोकतांत्रिक सिद्धांतों का इस्तेमाल करके एक ग्रामीण देश बदल रहा है। हम शांतिपूर्ण ढंग से बदलाव कर रहे हैं। महत्वपूर्ण सिद्धांत ये था कि बदलाव का फायदा सभी भारतीयों को मिले और कोई भी पीछे न छूटे। एक और सिद्धांत ये था कि यह मोटे तौर पर अलग-अलग लोगों के हिसाब से हो। भोजन, काम और सूचना का अधिकार ये सारा ढांचा बदलाव के दौरान लोगों को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए तैयार किया गया था।’
इस दौरान राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर सत्ता के केंद्रीकरण का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत तभी सफल हुआ, जब सत्ता विकेंद्रीकृत हुई। पिछले चार वर्षों में बड़े पैमाने पर सत्ता का केंद्रीकरण हुआ है। आज सत्ता की पूरी ताकत पीएमओ के पास केंद्रित हो गई है।
उन्होंने कहा कि चीन में भी इसी तरह का बदलाव हो रहा है। हमारी प्रक्रिया मूलभूत है, जबकि चीनी पद्धति थोड़ी हिंसक है। चीन आगे बढ़ रहा है और दुनिया में उस प्रगति का असर भी हो रहा है। भारत संतुलन की भूमिका निभा सकता है और पूरी दुनिया को सुरक्षित जगह बनाने के लिए का निर्माण कर सकता है।’
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘भारत टकराव को कम करने में माहिर है। भारत का बुनियादी सिद्धांत है कि जब कोई पूछे कि भारत का झुकाव ‘बाएं है या दाएं’, तो हमारा जवाब होगा ‘भारत सीधे खड़ा है।’
गांधी ने कहा, ‘भारत में मौजूदा सरकार के बारे में मेरी मुख्य शिकायतों में से एक यह है कि मुझे भारत की ताकत के आधार पर कोई सुसंगत रणनीति नहीं दिख रही है। मुझे केवल तात्कालिक प्रतिक्रियाएं दिखती हैं। यद्यपि चीन के साथ हमारा पारंपरिक इतिहास रहा है, लेकिन जहां तक लोकतांत्रिक ढांचे की बात है, तो हम यूरोपीय देशों के ज्यादा करीब हैं।’
राहुल गांधी ने आरएसएस पर भी हमला बोला है। उन्होंने नोटबंदी के फैसले को आरएसएस का निर्णय बताया है। उन्होंने कहा, ‘अगर आप अपने देश के ढांचे को गहराई से समझते हैं, तो आप संतुलित ताकत का इस्तेमाल करेंगे। आज मैं भारत को अपनी ताकत बढ़ाते नहीं देख पा रहा हूं। नोटबंदी का विचार वित्तमंत्री और आरबीआई को नज़रंदाज़ करके सीधे आरएसएस से आया और प्रधानमंत्री के दिमाग में बैठा दिया गया।’
लंदन से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरएसएस पर भारत की प्रकृति को बदलने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, ‘आज आरएसएस भारत की प्रकृति को बदलने की कोशिश कर रहा है। अन्य पार्टियों ने भारत की संस्थाओं पर कब्जा करने के लिए कभी हमला नहीं किया। आरएसएस की सोच अरब देशों की मुस्लिम ब्रदरहुड जैसी है।’
गांधी ने कहा, ‘साल 1947 में पश्चिम को भारत पर भरोसा नहीं था, लेकिन भारत ने पश्चिम को गलत साबित कर दिया। हमें सफलता इसलिए मिली, क्योंकि हजारों लोगों ने संस्थाओं का निर्माण किया और यही वो संस्थाएं हैं, जिन पर आज हमले हो रहे हैं।’
विदेशी धरती से राहुल गांधी ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर भी तंज कसा है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश मंत्री वीजा बनाने में ही काफी समय बिताती हैं और बाकी कामों के लिए कम समय देती हैं। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय का एकाधिकार मिटाकर और समाज के अन्य हिस्सों के लिए इसे और अधिक सुलभ बनाकर एक आधुनिक विदेश मंत्रालय बनाया जा सकता है।

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