फिल्म रिव्यूः देशप्रेम वाला ‘जीनियस’

फ़िल्म जीनियस की कहानी एक आईटी में पढ़ने वाले युवा वासु के असाधारण बुद्धि क्षमता की है। वह अनाथ है जिसे वृन्दावन के पुजारी ने पाला है और उसे वासुदेव शास्त्री नाम दिया है।
वृन्दावन से वासु (उत्कर्ष शर्मा) आईटी रुड़की में दाखिला लेता है। वहां उसकी मुलाकात नंदिनी (इशिता चौहान) से होती है और प्रेम करने लग जाता है। नंदिनी अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर है लेकिन वासु से पिछड़ जाती है।
वासु को फेल करने के लिए छल भी करती है मगर मात खाती है फिर भी वासु अपने प्यार की खुशी के लिए जानबूझकर फेल हो जाता है। वासु के मदद से परीक्षा में टॉप करने पर नंदिनी शर्मिंदा होती है और उसके मन में उसकी अच्छाई बस जाती है। नंदिनी विदेश चली जाती है और वासु वृन्दावन।
नेशनल सिक्युरिटी अडवाइजर कमिटी का सदस्य दास वासु की विलक्षण बुद्धि क्षमता से परिचित होता है। एक बार वासु की मदद से एनएसए का डेटा हैक होने से बचता है और उसके चीफ जयशंकर प्रसाद (मिथुन चक्रवर्ती) वासु की काबिलियत पर रॉ में शामिल कर लेता है।
वासु की टीम पोरबंदर बंदरगाह पर आईएसआई एजेंट एमआरएस यानी मिस्टर समर खान (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) जो खुद को जीनियस मानता है, उससे भिड़ता है जिसमें वह बुरी तरह जख्मी हो जाता है।
अपाहिज होने पर वासु को निकाल दिया जाता है। आगे वह साहस और सूझबूझ के साथ बड़ी बहादुरी से देश के गद्दार को खत्म कर सच्चे देशभक्ति का परिचय देता है।
फ़िल्म के लेखक निर्देशक अनिल शर्मा हैं जिन्होंने फरिश्ते, तहलका, हुकूमत, गदर, अपने, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों, द हीरो, वीर, महाराजा, सिंह साहब द ग्रेट जैसी भव्य फिल्में बनायी है। उनकी हर फिल्मों में देशभक्ति का रंग चढ़ा होता है तो फिर भला जब अपने जिगर के टुकड़े को हीरो बनाने चले तो देशप्रेम दिखाना कैसे भूल सकते थे।
जीनियस पूरी तरह उत्कर्ष की फ़िल्म है और वह एक परिपक्व अभिनेता की तरह पूरी फिल्म में डटे रहे।
मिथुन, केके रैना, नवाजुद्दीन, अभिमन्यु सिंह जैसे दमदार अभिनेता के साथ अनिल शर्मा ने अपने बेटे उत्कर्ष की प्रतिभा को बखूबी पेश किया है।
फ़िल्म का संगीत ठीक ठाक है। उत्कर्ष के नृत्य कौशल को और बेहतर ढंग से दिखाना चाहिए था।
– गायत्री साहू  (2.5 Star)

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