सफलता के लिए मकसद होता है महत्वपूर्ण

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कई बार हम कोई काम करने से पहले ही सोच लेते हैं कि अकेले हमारे करने से क्या होगा। मगर हम यह भूल जाते हैं कि हर कोई ऐसे ही सोच ले, तो कोई कभी नए काम के लिए कदम बढ़ाएगा ही नहीं। बचपन में हम सभी न यह कहावत जरूर सुनी होगी, बूंद बूंद से घड़ा भरता है। यहां बूंद-बूंद से अर्थ छोटे-छोटे प्रयासों से है। हमें हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रयास कभी छोटा या बड़ा नहीं होता है, बल्कि उससे जुड़ा मकसद ज्यादा अहम होता है। हमारी आज की कहानी में भी यही बात बताई गई है। आइए जानते हैं इसके बारे में :

रोहित आठवीं कक्षा का छात्र था। वह बहुत मेहनती था और हमेशा औरों की मदद के लिए तैयार रहता था। वह शहर के एक साधारण मोहल्ले में रहता था, जहां सड़क किनारे बिजली के खंभे तो लगे थे, पर उन पर बल्ब नहीं थे। बार-बार कहने के बावजूद कोई उन्हें देखने नहीं आया। रोहित अक्सर सड़क पर आने-जाने वाले लोगों को अंधेरे के कारण परेशान होते देखता था। उसके दिल में आता कि वो कैसे इस समस्या को दूर करे। जब वो अपने माता—पिता या पड़ोसियों से इस समस्या के बारे में बात करता तो सब इसे सरकार और प्रशासन की लापरवाही कहकर टाल देते।

ऐसे ही कुछ महीने और बीत गए। एक दिन रोहित ने तय किया कि अब वो इस समस्या को दूर करके ही रहेगा। वह कहीं से एक लंबा सा बांस और बिजली का तार लेकर आया और अपने कुछ दोस्तों की मदद से बांस को अपने घर के सामने गाड़कर उस पर एक बल्ब लगाने लगा। आस-पड़ोस के लोगों ने देखा तो पूछा, तुम यह क्या कर रहे हो? उसने बताया कि वह अपने घर के सामने बल्ब लगा रहा है। उसके कुछ दोस्तों और कॉलोनी के कुछ अंकल-आंटी ने कहा, इससे क्या होगा? अगर तुम एक बल्ब लगा भी लोगे तो भी पूरे मोहल्ले में रोशनी थोड़े ही हो जाएगी। आने-जाने वालों को तब भी तो परेशानी उठानी ही पड़ेगी।

रोहित बोला, आपकी बात सही है, पर ऐसा करके मैं कम से कम अपने घर के सामने से जाने वाले लोगों को तो परेशानी से बचा ही पाऊंगा। ऐसा कहते हुए उसने एक बल्ब वहां टांग दिया। रोहित की इस पहल की बात पूरी कॉलोनी में फैल गई। किसी ने उसके इस कदम की खिल्ली उड़ाई तो किसी ने उसकी तारीफ की। एक-दो दिन बीते तो लोगों ने देखा कि कुछ और लोगों ने आपने घरों के सामने बल्ब टांग दिए हैं। फिर क्या था, महीना बीतते-बीतते पूरा मोहल्ला रोशनी से जगमगा उठा। रोहित की इस पहल की खबर आला अधिकारियों तक भी पहुंची, तो उन्होंने भी कॉलोनी की स्ट्रीट लाइट्स ठीक करवा दीं।

इस कहानी से हम यह सीख सकते हैं : 

एक छोटी सी कोशिश भी बड़ा बदलाव ला सकती है, बशर्ते उसे करने के लिए कदम बढ़ाया जाए। कई बार छोटी-छोटी कोशिशें बड़ी समस्या का हल निकाल सकती हैं।

जीवन का कोई भी क्षेत्र हो, अगर हम कदम ही नहीं बढ़ाएंगे तो समस्या जस की तस बनी रहेगी। हर बार कोई महात्मा या भगत सिंह आपकी लड़ाई लड़ने नहीं आएगा।

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