अच्छे भावों के विकास और खराब भावों के विनाश का मानव करे प्रयास

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-बहती शीतल बयार के बीच महातपस्वी महाश्रमण ने किया लगभग नौ किलोमीटर का विहार
-तवरेकेरे स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय श्रीचरणों से हुआ पावन
-बच्चों ने स्वीकार किए अहिंसा यात्रा के संकल्प, आचार्यश्री ने की आशीषवृष्टि

12.06.2019 तवरेकेरे, बेंगलुरु (कर्नाटक): मानव अनेक चित्तों वाला होता है। मनुष्य के मन में विभिन्न प्रकार के भाव उभरते रहते हैं। विचार करें तो हमारी भावधारा में भी परिवर्तन होता रहता है। मानव कुछ समय पहले जो शांत दिखाई देता है, कुछ समय पश्चात ही गुस्से में दिखाई देने लगता है। पहले शांति में था, अब अशांति, उत्तेजना, आक्रोश में आ गया। आदमी कभी संतोष में होता है तो कभी उसके जीवन में लोभ की वृत्ति भी देखी जा सकती है। कभी विनम्रता की भावधारा प्रतीत होती है तो कभी आदमी अहंकार की भाषा बोलते हुए भी देखा जा सकता है। कभी सरल लगता है तो कभी छल-कपट भी करने लग सकता है। कभी सत्संस्कारी तो कभी असंस्कारी भी नजर आ सकता है। इस प्रकार मानव के भावधारा में परिवर्तन आता रहता है।
आदमी में अहिंसा के भाव होते हैं तो कभी उसमें हिंसा के भाव भी देखे जा सकते हैं। कभी उसमें अच्छाई नजर आती है तो कभी बुराई की बात भी सामने आ सकती है। आदमी को करना यह चाहिए कि आदमी को अच्छाई की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। आदमी अहिंसा और सत्संस्कार की पुष्टि की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। हिंसा का भाव कमजोर पड़ें, बुराई की चेतना समाप्ति की ओर जाए और कुसंस्कार विनाश को प्राप्त हो। हमारे जीवन में 84 लाख जीव योनियां होती हैं। एक दृष्टि से देखा जाए तो सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य होता है। दुनिया में मनुष्य से सर्वश्रेष्ठ कोई नहीं होता तो दुनिया में मनुष्य से अधमतम भी कोई नहीं होता। आदमी को अच्छाई की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए और निरंतर पुरुषार्थ करते रहना चाहिए। आदमी को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए, बल्कि पुरुषार्थ करना चाहिए। इसके माध्यम से मानव अपने भीतर अच्छे भावों का विकास करने का प्रयास और खराब भावों के विनाश करने का प्रयास करे तो जीवन अच्छा हो सकता है। जीवन को नई दिशा देने वाली पावन प्रेरणा परम पावन आचार्यश्री महाश्रमणजी ने तवरेकरे स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में समुपस्थित श्रद्धालुओं को प्रदान की।
बुधवार को प्रातः आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी अहिंसा यात्रा के साथ औद्योगिक क्षेत्र नरसापुरा से मंगल प्रस्थान किया। तमिलनाडु की गर्मी के बाद कर्नाटक की शीतलता बहुत ही भली लग रही है। यहां की सूर्य चमकता तो जरूर है, किन्तु धरती पर छाई हरियाली और इससे उत्पन्न शीतलता मानों उसके प्रभाव को कम कर देती है। तमिलनाडु में जहां रात में भी गर्मी लगती थी, वहीं कर्नाटक प्रवेश के बाद से मध्य रात्रि के बाद तो ठंड लगने लग रही है।
प्रातः आचार्यश्री ने विहार किया तो मौनसूनी बादलों के आवागमन से सूर्य प्रायः अदृश्य बना हुआ था। बहती शीतल बयार वातावरण को खुशनुमा बना रही थी। वहीं ऐसे मौसम में धरती की हरियाली भी लोगों का मन मोह रही थी। राष्ट्रीय राजमार्ग पर गतिमान राष्ट्रसंत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने विहार के दौरान कोलार जिले से बेंगलुरु जिले की सीमा में मंगल प्रवेश किया। कुल लगभग नौ किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ तवरेकरे गांव स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में पधारे। यहां समुपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने पावन पाथेय प्रदान करने के उपरान्त समुपस्थित छात्रों को अहिंसा यात्रा के संकल्प प्रदान किए और उन्हें पावन आशीष प्रदान की। श्री मोहनजी ने आचार्यश्री के समक्ष अपनी भावाभिव्यक्ति दी।

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