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केंद्र के शीर्ष स्तर के अधिकारियों के बीच घमासान, गुजराती बनाम गैर गुजराती

File Photo

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच गुजराती और गैर गुजराती कैडर के अफसरों के बीच तनातनी देखने को मिल रही है पिछले तीन चार माह से शीर्ष स्तर के अधिकारियों के बीच आरोप प्रत्यारोप और विश्वसनीयता को लेकर ऐसा माहौल बना है।जिसने केंद्र सरकार की मुसीबतों को बढ़ा दिया है।
केंद्र सरकार द्वारा संयुक्त सचिव के पद पर सीधी भर्ती किए जाने से भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पहले ही नाराज थे। इसके साथ ही गुजरात कैडर के अधिकारियों का वर्चस्व पिछले 2 वर्षों में काफी बढ़ गया है। पीएमओ से सीधे जुड़े होने के कारण गुजरात कैडर के अधिकारी अन्य कैडर के अधिकारियों को अविश्वसनीय मानते हुए, उनके साथ निम्न दर्जे का व्यवहार करते हैं।जिसके कारण शीर्ष स्तर के अधिकारियों में इस समय टकराव बना हुआ है। गुजरात कैडर और अन्य कैडर के अधिकारी एक दूसरे को निपटाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट,जनहित याचिकाओं, छापेमारी और एक-दूसरे के खिलाफ फाइलों में टिप्पणी करने, मीडिया में खबरें लीक करने,फोन टेप कराने जैसी कार्यवाही इन दिनों अधिकारियों के बीच काफी बढ़ गई है। शीर्ष स्तर के अधिकारी फोन टैपिंग की आशंका के चलते भयभीत हैं। केंद्र सरकार के अधिकारी निर्णय लेने और जिम्मेदारी लेने से बचने लगे हैं ।जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों को पहली बार विषम स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्वतंत्र भारत के इतिहास में कभी भी शीर्ष स्तर के अधिकारियों में  इस तरीके की स्थिति देखने को नहीं मिली। पीएमओ के पास सारी शक्तियां केंद्रित हो जाने के कारण अब संयुक्त सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी भी अपने आप को अपमानित महसूस कर रहे हैं। जिसके कारण केंद्र सरकार के अधिकारियों में एक ठहराव देखने को मिल रहा है।
हाल ही में गृह मंत्रालय में गृह सचिव रहे राजीव महर्षि को कश्मीर के राज्यपाल बनाने की चर्चाएं थी।किंतु शीर्ष स्तर के अधिकारियों के बीच की टकराहट को देखते हुए इस पद पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने सतपाल मलिक की नियुक्ति कर दी। उल्लेखनीय है,पिछले 40 वर्षों से जम्मू कश्मीर के राज्यपाल पद पर नौकरशाहों की नियुक्ति होती रही है। अधिकारियों के बीच चल रही खींचतान के कारण सत्ता के गलियारे में इन दिनों अनिश्चय की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों द्वारा यह भी कहा जा रहा है कि वर्तमान सरकार द्वारा किए जा रहे विवादास्पद निर्णयों की डिटेल अधिकारियों द्वारा विपक्ष को उपलब्ध कराई जा रही है। जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की मुश्किलें बढ़ रही हैं। कुछ माह बाद लोकसभा चुनाव होने हैं ऐसी स्थिति में शीर्ष स्तर के अधिकारियों की यह टकराहट सरकार पर भारी पड़ सकती है।

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