किस्मत को दोष देने से अच्छा है सफलता के लिए नए रास्तों की तलाश करना

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कुछ चुनौतियां बड़ी होती हैं, पर कुछ को हम खुद भी बड़ा बना लेते हैं। जहां जरूरत सीधे रास्तों पर चलने की होती है, हम टेढ़ी राह पकड़ लेते हैं। और फिर, कभी दूसरों को तो कभी किस्मत को दोष देने लगते हैं। ये देखना जरूरी है कि कहीं हम ही तो अपने काम और रिश्तों को जटिल नहीं बना रहे!

दूसरों को जगह ना देना 
अपनी जिंदगी की कहानी के हीरो आप हैं। पर आपकी कहानी को आगे बढ़ने के लिए दूसरों का साथ भी चाहिए होता है। यह साथ तभी मिलता है, जब आप उन्हें अपनी कहानी में शामिल करते हैं। नए पात्रों को अपनाते हैं, उनकी कहानियां सुनते हैं। उनकी समस्याओं में उनके साथ खडे़ होते हैं। पर समस्या यह होती है कि हम दूसरों से अपेक्षाएं तो रखते हैं, पर उनकी एहमियत मानने को तैयार नहीं होते। उन्हें उनकी भूमिका का श्रेय नहीं देते। उनसे अपनी बातें नहीं कहते। बेकार की तुलनाएं करके अपनी चिंताएं बढ़ाते हैं।

जोखिम ना उठाना 
समस्याओं से भागना और खुद को बदलने की कोशिश ना करना, समस्याएं बढ़ा देता है। बिजनेस कोच व वर्ड स्टाइलिस्ट जूडी स्यूई कहती हैं,‘हम जितनी चिंता करते हैं, उतनी योजनाएं नहीं बनाते। जितनी योजना बनाते हैं, उतना काम नहीं करते। चिंता करने और हल ढूंढने में फर्क होता है। खुद पर भरोसा रखें।’ हर समय दूसरों को खुश करने में रहना हमें जोखिम लेने से रोकता है। अपने मन की सुनें। गलतियां करने से डरे नहीं।’

हर बात पर अहं को आड़े लाना 
हर बात को घुमा-फिराकर खुद पर ले    आना या खुद पर ले लेना मन को शांत नहीं होने देता। ‘वह हमें ही देख रहा है’, ‘वे मेरे बारे में ही बात कर रहे होंगे’, ‘उसने यह  बात मुझे ही निशाना बनाकर कही’, उसने मुझे नीचा दिखाने के लिए वैसा किया…  दिन में दूसरों की कई ऐसी बातें होती हैं, जिनका हमसे कोई मतलब नहीं होता। पर हम उसे अपने ऊपर ओढ़ लेते हैं। खुद पर चोट मान लेते हैं। ध्यान रखें, आपके अलावा भी दूसरों के पास सोचने और करने के लिए बहुत कुछ हो सकता है। जरूरी नहीं कि दूसरे जो कर रहे हैं, आपको दुखी करने के लिए कर रहे हैं। हर बात को व्यक्तिगत ना बनाएं।

हर समय बुरा ही सोचना 
जरा सा कुछ होता है कि हम सब कुछ बुरा होने की आशंका से घिर उठते हैं। मन मे ंबुरे पक्षों की कड़ियां ही जोड़ने लगते हैं। नतीजा, हम खुद को नई चिंताओं और डर में जकड़ लेते हैं। यह सोचिए तो कि सब कुछ बुरा आपके साथ ही क्यों होगा।

बेकार की अपेक्षाएं रखना 
माना कि आप दूसरों को बहुत प्यार करते हैं। आप सब कुछ उन्हीं को ध्यान में रखकर करते हैं। पर यह जरूरी नहीं कि दूसरे भी ऐसा ही करें। उनकी जिंदगी का विस्तार  कुछ और किनारों पर भी हो सकता है। लाइफ कोच हेनरी जुनटिला, वेक अप क्लाउड में लिखती हैं, ‘दूसरों से अपेक्षाएं जितनी कम होंगी, खुशी उतनी ही ज्यादा होगी। सबकी जरूरतें समय के साथ बदलती हैं। अपनी जरूरतों का भी ध्यान रखें।’

बीती बातों में अटके रहना 
ऐसा कतई नहीं कि15 साल पहले जैसा दूसरे करते थे, वैसा आज भी करेंगे। या फिर बीते कल में कुछ बुरा हुआ है तो आगे भी बुरा ही होगा। लेखक और वकील टिम होच कहते हैं,‘ जिंदगी की किताब में कई पाठ होते हैं। किताब पूरी पढ़ने के लिए हर चैप्टर को पढ़ना जरूरी है। एक ही पाठ पर अटके ना रहें।’ प्यार, सेहत, रिश्ते और पैसा इनके बारे में अपनी सोच को ठीक रखें। हर चीज को काबू में करने की बजाए, नई चीजों को गले लगाने का साहस रखें।

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