आचार्य महाश्रमण के मुम्बई चातुर्मास हेतु विचार संगोष्ठी

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मुंबई। साध्वी श्री अणिमा श्रीजी एवं साध्वी मंगलप्रज्ञा जी का भायंदर पूर्व में अम्बेश भवन में दो दिवसीय प्रवास के पश्चात मीरा भायंदर के लोकप्रिय विधायक नरेंद्र मेहता का निवास स्थान पर एक दिवसीय प्रवास हेतु पदार्पण हुआ। विधायक नरेंद्र मेहता , धर्मपत्नी सुमन मेहता मीरा भायंदर के महापौर डिम्पल ने हर्षोत्फुल होकर साध्वी वृन्द की अगवानी की एवं श्रद्धा व भक्ति के साथ स्वागत किया। इस अवसर पर तेरापन्थ समाज के वरिष्ठ श्रावक ख्यालीलाल तातेड़, रमेश धाकड़, भवरलाल कर्णावट , अभातेयुप के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी भलावत मुंबई सभा अध्यक्ष नरेंद्र तातेड़, भायंदर सभा अध्यक्ष प्रदीप बच्छावत , बीजेपी, के कार्यकर्ता हनुमान पारख पारस कच्छारा, आदि मीरा भायंदर के अनेक श्रावक , श्राविकाएं उपस्थित थी।
साध्वी श्री अणिमा श्रीजी ने अपने प्रेरक उदबोधन में कहा मीरा भायंदर का यह क्षेत्र का यह क्षेत्र जैन समाज का गढ़ कहा जा सकता है। जहाँ चौदह हजार जैन परिवार रहते है। प्रतिवर्ष सैकड़ों साधु साध्वियों व आचार्य भगवन्तों के चरणों से यह धरा पावन व पुनीत बन चुकी है। यहां के विधायक नरेन्द्र मेहता एक श्रद्धाशील श्रावक है। साधु साध्वियों के भक्त है। ग्यारह वर्ष पूर्व हमारे भायंदर चातुर्मास में महापौर के रूप इन्होंने हमारी सेवा उपासना की है। और आज विधायक के रूप में हमारे पास बैठे है। इनकी श्रद्धा भक्ति आस्था समर्पण बेजोड़ है। कार्यकरने की शैली अनूठी है। काम करने का जज्बा है । विकास के प्रांशु शिखर पर आरोहण करे , हम मंगलकामना करते है। सन दो हजार तेईस का पूज्य प्रवर आचार्य आचार्य श्री महाश्रमण जी का चातुर्मास मुंबई महानगर को प्राप्त हुआ है। तेरापंथ समाज के साधु जुड़कर नरेन्द्र मेहता को महासूर्य की अगवानी करनी है। चातुर्मास की पृष्ठभूमि में अपने समय , श्रम व शक्ति का नियोजन करना है।
विधायक नरेंद्र मेहता ने कहा मै साध्वी श्री अणिमा श्रीजी को गुरु के रूप में देखता हूं। आपके चातुर्मास में मैं तेरापन्थ समाज से विशेष रूप से जुड़ा। आपका आशीर्वाद, आपकी प्रेरणा मेरे जीवन को नई दिशा देगी। आपका जो भी आदेश होगा उसे मैं पूरा करने की कोशिश करूंगा। मुझे लगता है कि आचार्य महाश्रमण जी का मुंबई में चातुर्मास मीरा भायंदर में ही होगा। मैं उसमे निमित्त बनुगा। सफलतम ऐतिहासिक चातुर्मास का इतिहास लिखा जाएगा। उसमें छोटा सा नाम मेरा भी अंकित होगा। साध्वी श्रीजी आप जहां भी रहे। आपकी दर्शन सेवा का लाभ मुझे मिलता रहे। ऐसी मेरी भावना है।
साध्वी सुधाप्रभाजी ने अपने भावो की सटीक प्रस्तुति दी। महापौर डिम्पल मेहता ने अपने ह्रदयोदगार व्यक्त किए। बी.सी भलावत ने कहा साध्वी श्री अणिमा श्रीजी हमारे धर्मसंघ की प्रथम पंक्ति की साध्वी है। आपने अनेक कार्यकर्ताओं को तैयार किया। आपको काम करने का अलग ही अंदाज़ है। आप जो सोच लेती है। वो काम करके ही दम लेती है। आपकी प्रेरणा हमारे भीतर जोश भरती रहे। ख्यालीलाल तातेड़, रमेश धाकड़, भवरलाल कर्णावट, सभाध्यक्ष नरेंद्र तातेड़ ने विचार रखे। एवं सभी ने सन दो हजार तेईस के लिए नरेन्द्र मेहता से विचार मंथन किया। यह जानकारी पारस कच्छारा ने दी।

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