शीना बोरा जैसा कत्ल, एटीएम से निकले पैसों से सुलझी गुत्थी

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मुंबई:शीना बोरा जैसा एक और कत्ल सामने आया है। बस, फर्क यह रहा कि जहां शीना बोरा की हत्या की गुत्थी सुलझने में मुंबई पुलिस को तीन साल लगे, वहीं 28 साल की रोहिणी घोरपडे के कातिलों को मानखुर्द पुलिस ने दो महीने में पकड़ लिया। गुरुवार को रोहिणी की लाश के अवशेष माणगाव के एक गड्ढे से बरामद किए गए। पुलिस ने इन्हें फरेंसिक जांच के लिए भेजा है।
पुलिस के अनुसार, रोहिणी वाशी के एक अस्पताल में काम करती थीं और मानखुर्द में रहती थीं। वह 14 दिसंबर, 2018 को घर से यह कहकर निकली कि उन्हें एक फ्रेंड की शादी में जाना है। जब वह कई घंटे बाद भी वापस नहीं लौटीं तो उसके भाई ने मानखुर्द पुलिस में मिसिंग की एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस जब उन्हें ढूंढने की कोशिश कर रही थी, तभी जांच में पता चला कि उसके एटीएम कार्ड से 14 और 15 दिसंबर को 65 हजार रुपये निकाले गए हैं। पुलिस ने बैंक से जब पड़ताल की तो पता चला कि यह ट्रांजैक्शन वाशी और खोपरखैरणे के दो एटीएम सेंटरों में हुआ है। पुलिस टीम फिर इन दो एटीएम सेंटर में गई। वहां के सीसीटीवी फुटेज देखे लेकिन रकम निकालने वाले की तस्वीर धुंधली दिख रही थी।
पुलिस ने फिर दोनों एटीएम सेंटरों के मोबाइल टॉवर से तमाम संदिग्धों का कॉल डेटा निकाला। इसी में एक नाम रामचंद्र जाधव शक के घेरे में आया। पुलिस ने जब जाधव की पृष्ठभूमि निकाली, तो पता चला कि वह एक केबल ऑपरेटर के यहां काम करता है। जांच टीम जब इस ऑपरेटर के पास गई तो उसने बताया कि वह सातारा अपने गांव गया हुआ है। पुलिस फिर उसकी तलाश करती रही। दो दिन पहले जब वह ट्रेस हुआ, तो उससे पूछताछ में 44 साल के सुनील शिर्के और 22 साल के विजय मोरे के नाम सामने आए। पुलिस ने फिर इन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया। विजय के बारे में पता चला है कि वह बेस्ट में ड्राइवर है जबकि सुनील शिर्के वाशी के उसी अस्पताल में काम करता है, जहां रोहिणी नौकरी करती थी।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि रोहिणी से सुनील शिर्के की लंबे समय से फ्रेंडशिप थी। जैसा कि सुनील का दावा है कि रोहिणी उस पर शादी का दबाव डाल रही थी। सुनील पहले से शादीशुदा है, इसलिए वह उससे शादी करना नहीं चाहता था लेकिन रोहिणी ने जब अपना दबाव कम नहीं किया, तब सुनील ने अपने दो दोस्तों रामचंद्र जाधव और विजय मोरे के साथ मिलकर उसकी हत्या की साजिश रची। सुनील ने 14 दिसंबर को बहाने से रोहिणी को बुलाया। इसके बाद वह अपने दोनों दोस्तों के साथ उसे लेकर रायगढ गया। वहां तीनों ने रोहिणी की हत्या कर दी और फिर उसकी लाश को माणगाव के एक गड्ढे में गाड़ दिया। इस गड्ढे को सुनील शिर्के ने वारदात से तीन दिन पहले ही खुदवा दिया था।

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