जलगांव में साध्वी प्रमुखाश्री के 48 वें मनोनयन दिवस पर ‘सुरों भरी शाम – नारी के नाम’ का आयोजन

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जलगांव। अ.भा.ते.म.मं द्वारा निर्देशित संगीत की रंगारंग प्रतियोगिता कि समायोजना तेरापंथ महिला मंडल द्वारा विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्री जी आदि ठाणा 6 के सानिघ्य मे आयोजित की गई।मंडल की युवती बहिनों ने विशेष कर महाश्रमणी जी की कृति – गीत ये निर्माण के गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। श्रोताओं ने ऊं अर्हं की विशेष ध्वनि से सबका बार – बार उत्साहवर्धन किया।
विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्री जी ने संभागियों एवं श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा – संगीत एक ऐसे आकर्षण का विषय है जो छोटे – बडें सभी को बांध लेता है। महाश्रमणी साध्वी प्रमुखा जी द्वारा रचित ये गीत सबके मानस को झंकृत करनेवाले हैं। युवती बहिनों ने इन गीतों की लयात्मक प्रस्तुति से न केवल सबको भाव – विभोर किया हैं,अपितु अपनी प्रतिभा का भी विशेष परिचय दिया है। उनकी प्रतिभा मे और अधिक निखार आता रहे।
प्रबुद्ध साध्वीश्री योगक्षेमप्रभा जी ने अपने संक्षिप्त सारगर्भित  वक्तव्य में कहा-आज जलगांववासी बडे उल्लास और उमंग के साथ यहाँ उपस्थित हुए हैं। साध्वी प्रमुखाश्री जी ने तीन – तीन आचार्यों की उपासना कर संघ पर अपने कर्तृत्व की विशेष छाप छोडी है। उनकी समता, क्षमता और ममता से बहिनों ने बहुत कुछ सीखा है। आज की यह संगीत प्रतियोगिता भी एक प्रेरणा है।
प्रतियोगिता में सुभद्रा ग्रुप ने प्रथम स्थान प्राप्त कर अपने कौशल का परिचय दिया। सुंदरी ग्रुप द्वितीय स्थान पर काबिज हुआ। तृतीय स्थान पर सीता एवं चंदनबाला ग्रुप रहा। सभी विजेताओं को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। कन्या मंडल ने प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त किया। सहभागिता पांच ग्रुप की रही।
तेममं अध्यक्ष श्रीमती संतोष छाजेड़ ने सबका हार्दिक स्वागत किया। तेममं मंत्री श्रीमती निर्मला छाजेड़ ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम की समायोजना मे साध्वी योगक्षेमप्रभा जी का उल्लेखनीय श्रम रहा। उनके कुशल मंच संचालन ने सभी श्रोताओं को बांधे रखा। प्रतियोगिता में निर्णायक का दायित्व श्री ठाकरमल जी सेठिया ने निभाया। मनोनयन दिवस के उपलक्ष्य में प्रथम चरण का कार्यक्रम उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया गया। अनेक वक्ताओं ने अपने भावपूर्ण उद्गार व्यक्त किए। साध्वी श्री योगक्षेमप्रभा जी ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की। साध्वी लावण्यप्रभाजी, कुंदनयशाजी, मुदितप्रभाजी व मधुरप्रभाजी ने असाधारण साध्वी प्रमुखाश्री जी के प्रति गीत की अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ सभा, तेयुप व खानदेश सभा की ओर से माणकचंद जी बैद, जीतेंन्द्र चोरडिया, अनिल जी सांखला ने उद्गार प्रकट किए।

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