महाश्रमणी साध्वी प्रमुखा श्री कनकप्रभाजी की 48वाँ चयन दिवस मनाया

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उल्लासनगर। आचार्य श्री महाश्रमणजी कि विदुषी शिष्या शासनश्री साध्वी सोमलताजी व साध्वीवृंद के मंगल सानिध्य में महाश्रमणी प्रमुखाश्री कनकप्रभाजी का चयन दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आगाज़ साध्वीश्री के महामंत्रोच्चार से हुआ। मंगलाचरण डोंबीवली तेयुप मंत्री सुरेश बैद ने किया।
शासनश्री साध्वी सोमलताजी ने अपनी आकर्षक वक्तृत्ववशैली में गंगाशहर के गरिमापूर्ण व ऐतिहासिक कार्यक्रम की सजीव झलक प्रस्तुत कर पुरी परिषद को भावविभोर बना दिया। आपने कहा- तेरापंथ धर्मसंघ की तेजस्विता और यशस्विता में आचार्यों के कुशल नेतृत्व के साथ साध्वी प्रमुखाओं के समर्पण और पुरुषार्थ का मणि कांचन योग रहा है।
साध्वी प्रमुखाश्री कनकप्रभाजी अतीत की साध्वी प्रमुखाओं के इतिहास को तीन तीन आकाशीय ऊँचाई प्रदान कर रही है। यह तेरापंथ धर्मसंघ के स्वर्णिम अध्याय का बहुमूल्य अध्याय है आप श्री का लेखन वक्तृत्व अनुशासन कौशल और प्रमत्त जीवनशैली अजोड और अतुलनीय है। इस उम्र में भी आपकी सक्रियता और कर्मठता युवापीढ़ी के लिए ज्वलंत प्रेरणा है और पौरुष प्रदीप और विनम्रता से विभूषित महाश्रमणजी का सान्निध्य हमें प्रलम्ब काल तक आचार्यश्री की सन्निधि में मिलता रहे। आप श्री ने साध्वी को समाज को ही नहीं महिला समाज को भी अमृतोपम मार्गदर्शन दिया है।
अप्रतिम आलोक पथ दिखाया है । उस पथ पर हम सबकी प्रकाश यात्रा अनवरत गतिमान रहे ।
साध्वी श्री शकुन्तला कुमारिजी , रक्षितयशाजी ने आस्थासिक़्त गीत के संगम में परिषद ने स्वर से स्वर मिलाकर हॉल को गुजायमान कर दिया । साध्वी श्री जागृतप्रभाजी कविता पेश की । साध्वी श्री संचितयशाजी ने अपने संस्मरणों में साध्वी प्रमुखा श्री जी के वात्सल्य और अनुशासन को शब्दांकित किया ।
डोंबिवली सभाध्यक्ष सुरेशजी सिंघवी ने शृद्धासिक्त भावों की अभिव्यक्ति दी । स्थानीय सभाध्यक्ष कुमारभाई, कोषाध्यक्ष -सूर्यकांत, ट्रस्टी नारायण भाई, आनंद भाई , राजू भाई , गुलाब भाई , गिरीश भाई , धनश्याम भाई , नवरतनजी पगलिया , विनोद भाई , मुरली भाई , राकेश भाई , जुनेश भाई , नरेश भाई , आदि जयश्री , वंदना , पूनम , माया , अंजू , ज्योति , आदि ने मूक गुणांजलिसमर्पित की ।
डोंबिवली से समागत सभा मंत्री कैलाशजी सिंयाल , तेयूप अध्यक्ष ललितजी सिंघवी , तेयूप उपाध्यक्ष राकेशजी कोठारी महिला मंडल व आस पास के क्षेत्र पलावा,लोढ़ा,डोंबिवली , बदलापुर,विट्ठलवड़ी के श्रावक समाज की अच्छी उपस्थिति रही ।

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