मुंबई: रेलवे ने दिए सफर को आसान बनाने के ‘संकेत’

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मुंबई:प्लैटफॉर्म पर आप किसी ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं लेकिन ट्रेन में सवार होने के बाद पता चलता है कि आप दूसरी ट्रेन में चढ़ गए हैं, यह वह ट्रेन नहीं थी, जिसकी सूचना इंडिकेटर पर लगी थी। खराब और पुराने इंडिकेटर जानलेवा भी साबित हो सकते हैं, क्योंकि जब गलत ट्रेन में चढ़ते हैं तो घबराहट में यात्री चलती ट्रेन से उतरने की कोशिश भी करते हैं।

प्लैटफॉर्म पर ‘टॉर्चर’

दहिसर में रहने वाले राजीव सिंघल के अनुसार, ‘मैं अपने काम के सिलसिले में दहिसर से चर्चगेट तक अलग-अलग स्टेशनों पर उतरता रहता हूं। लगभग हमेशा ही इंडिकेटर खराब मिलते हैं। यदि इंडिकेटर पर कोई सूचना न हो तो चलेगा लेकिन गलत सूचना हो तो यात्रियों की परेशानी बढ़ जाती है। इंडिकेटर पर दी हुई सूचनाओं को वेरिफाई करने के लिए प्लैटफॉर्म पर आ रही ट्रेन के आगे झुककर डेस्टिनेशन की सूचना पढ़नी पड़ती है। यह कितना खतरनाक है।’

यहां है मुसीबत की जड़
किसी भी इलेक्ट्रिक आइटम की लाइफ 5 वर्ष की होती है। मुंबई उपनगरीय स्टेशनों पर लगे लगभग सभी इंडिकेटर्स पुराने हो चुके हैं। पुरानी टेक्नॉलजी वाले ये इंडिकेटर्स केबल पर चलते थे। यदि केबल में खराबी हुई तो सिग्नल भी खराब। बारिश में तो सिग्नल का खराब होना तय था लेकिन आरडीएसओ द्वारा रिसर्च करके आईपी आधारित इंडिकेटर ईजाद किए गए हैं। पश्चिम रेलवे ने अक्टूबर 2018 में ऐसा ही एक इंडिकेटर मुंबई सेंट्रल के एफओबी पर लगाया था, जो 5 महीने बाद भी सटीक काम कर रहा है।

बदले जा रहे हैं इंडिकेटर
मार्च 2019 तक मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे के सभी महत्वपूर्ण स्टेशनों पर आईपी आधारित इंडिकेटर्स लगा दिए जाएंगे। पश्चिम रेलवे में 50 प्रतिशत इंडिकेटर अगले एक महीने में बदल दिए जाएंगे, यानी लगभग 500 इंडिकेटर को आईपी आधारित इंडिकेटर से बदला जा रहा है। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रविंद्र भाकर ने बताया कि सबसे पहले विरार से बोरीवली के बीच सारे इंडिकेटर बदले जा रहे हैं। एलईडी डिस्पले वाले नए इंडिकेटर बहुत ही कारगर साबित होने वाले हैं।

खास हैं आईपी बेस्ड इंडिकेटर
-ये नए इंडिकेटर एलईडी डिस्पले वाले होते हैं। यानी इनकी दृश्यता पुराने इंडिकेटर के मुकाबले कहीं अधिक है।
-इनमें ट्रेन के आने का अपेक्षित समय दिखाया जाता है, यानी अब अलग से दिखाने की जरूरत नहीं कि ट्रेन कितने मिनट बाद आएगी।
-इन्हें चलाने के लिए कंप्यूटर सिस्टम के लिए स्टैंडबाय दिया जाता है, जो इंडिकेटर को कंट्रोल करता है। अगर एक कंप्यूटर फेल हो गया तो दूसरा कंप्यूटर उसकी जगह ले लेगा।
-ये पूरी तरह से ऑप्टिकल फाइबर कैबल पर आधारित हैं। बिजली में हुई गड़बड़ी से इनका कोई लेनादेना नहीं है।

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