‘वसीयत: संस्कारों की- संपत्ति की’: टीपीएफ कार्यशाला में उमड़ा जनता का सैलाब

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जलगांव। टीपीएफ की नवगठित शाखा, जलगाँव के पदाधिकारियों एवं सदस्यों में आज विशेष उत्साह था क्योंकि आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी शिष्या साध्वी निर्वाणश्रीजी के सानिध्य में उनकी प्रथम कार्यशाला समायोजित हो रही थी! अणुव्रत भवन के सभागार में उपस्थित संभागियों एवं श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए साध्वी श्री ने कहा – ‘वसीयत: संस्कारों की-संपत्ति की’ के प्रथम चरण में हम चिंतन करें कि हमारे पास ज्ञान, दर्शन और चरित्र की अखूट संपदा है! उस संपदा को हम स्वयं तक ही सीमित न रखें, अपितु आनेवाली पीढी को भी उसकी जुंजी सौंपे! यों तो हर व्यक्ति पूर्व जन्म से संस्कार लेकर आता है, पर माता-पिता और वातावरण से भी वह बहुत से संस्कार अर्जित करता है! व्यक्ति स्वयं संस्कारवान होकर ही दूसरों को अच्छे संस्कार दे सकता है!
कार्यशाला की मुख्य प्रवक्ता प्रबुद्ध साध्वी योगक्षेमप्रभाजी ने कहा – एक मां के लिए संस्कार निर्माण का उपयुक्त समय गर्भकाल है! जो माताएँ इस समय में सजग होती है वे अपने संयमित आहार और जीवनचर्या से बच्चों को अच्छे संस्कार देती है! संस्कार जीवन की उत्कॄष्ट संपदा है! उस संपदा के सामने भौतिक संपदा का मुल्य अकिंचितकर है! अत: सद्संस्कारों की विरासत/ वसीयत आप स्वयं अपनी आनेवाली पीढी को सौंपे! इस अवसर पर साध्वीवॄंद ने समवेत स्वरों में जागे शुभ संस्कार गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी!
कार्यशाला के व्दितीय चरण में मुख्य वक्ता एडवोकेट राज सिंघवी (मुंबई) ने विषय को विश्लेषित करते हुए कहा- ‘वसीयत आपके जीवन की एक जरुरत है! जो लोग समय पर अपनी वसीयत बना लेते है वे भावी पीढी को निश्चिंत कर देते है! आनेवाले विग्रहों से भी परिवार को बचा लेते है! साध्वीश्री जी ने आध्यातमिक वसीयत का रुप समझाया! मैं आपको भौतिक वसीयत-चल-अचल संपत्ति के विषय में समझाना चाहूँगा!’ विषय विश्लेषण के साथ श्रोताओं की जिज्ञासाओं का सुंदर एवं सटीक समाधान किया!
कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के समुच्चारण के साथ हुआ! टी. पी. एफ. की अध्यक्षा श्रीमती वर्षा चोरडिया ने आगंतुकों का हार्दिक स्वागत किया एवं अजय जैन ने धन्यवाद ज्ञापन किया! कार्यशाला में तेरापंथी श्रद्धालुओं के अतिरिक्त जैन समाज के अन्य महानुभवों की भी गरिमामयी उपस्थिती रही! कार्यशाल को सफल बनाने में उमेश सेठिया, विशाल कुचेरिया, रविंद्र छाजेड़, अनिल साखंला, सुमित छाजेड़ आदि का उल्लेखनीय सहयोग रहा! यह कार्यशाला प्रात: 9.15 से 11.40 तक अस्खलित रुप से चली!

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