मालेगांव मामले में सुचारू रूप से सुनवाई के लिए सभी अड़चनें दूर की जाएं: हाई कोर्ट

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मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले की सभी अड़चनों को दूर करने और सुचारू रूप से सुनवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति ए एस गडकरी की पीठ ने कहा कि इस मामले में विभिन्न पक्षों ने अलग-अलग आधारों पर हाई कोर्ट में 20 से अधिक आवेदन और अपील दायर की हैं।
अदालत ने कहा कि ऐसे में अदालत को भारी मात्रा में कागजात और 4000 से अधिक वस्तुओं पर गौर करना है। पीठ ने कहा, ‘अगर पक्ष आवेदन दायर करते रहेंगे तो अदालत से इन आवेदनों को समय पर निपटाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। हमें लगता है कि इनमें से कई आवेदन और याचिकाएं व्यर्थ की भी हो सकती हैं।’
पीठ ने यह भी कहा, ‘अभियोजन एजेंसी के तौर पर यह सुनिश्चित करना आपकी (एनआईए) जिम्मेदारी है कि सभी अड़चनें हटाई जाएं और सुनवाई सुचारू रूप से चल सके।’ पीठ इस मामले के सह आरोपी समीर कुलकर्णी की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष एनआईए अदालत के 2017 के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश में एनआईए अदालत ने गवाहों के बयानों और आरोपियों के कबूलनामे की प्रतियों को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी।

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