कालबादेवी तेरापन्थ भवन में मुम्बई स्तरीय सास-बहु कार्यशाला का आयोजन

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मुंबई। साध्वी श्री आणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञा जी के सांनिध्य में एम .पी स्कूल के विशाल हॉल में अखिल भारतीय महिला मंडल के निर्देशन में दक्षिण मुंबई महिला मंडल द्वारा मुंबई स्तरीय सास बहु सम्मेलन का विराट स्तर पर आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समारोह अध्यक्ष के रूप में अखिल भारतीय महिला मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्षा कुमुद कच्छारा , मुख्य अतिथि के रूप में हास्य कवियत्री सविता कोचर विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर सेविका रीटा मकवाना मुंबई महिला मंडल अध्यक्षा जयश्री बड़ाला उपस्थित थे। अखिल भारतीय महिला मंडल की ट्रस्टी प्रकाश देवी तांतेड़, परामर्शक प्रेमलता सिसोदिया, कांता तांतेड़, पिंकी कच्छारा, निर्मला चंडालिया , मीना कच्छारा, तरुणा बोहरा, निर्मला चंडालिया, सुमन बच्छावत, विमला नाहटा, भारत जैन महामण्डल की महामंत्री सीमा गंगवाल की गरिमामय उपस्थित ने कार्यक्रम की शोभा को शतगुणित किया।
साध्वी श्री आणिमाश्रीजी ने अपने प्रेरणादायीं उदबोधन में कहा हमारा जीवन माँ बेटी , भाई बहन , बाप बेटे , पति पत्नी , ननद भाभी , देवरानी जेठानी , सास बहु आदि संबंधो पर आधारित है। यदि सम्बन्धों में मधुरता होती है, आपसी तालमेल अच्छा होता है, तो घर आंगन में खुशहाली के दिप जगमगाने लगते है। जबकि रिश्तों के आईने में सास बहु का महत्वपूर्ण स्थान है। पारिवारिक जीवन मे सास वह सोपान है, जो सारे सोपानो को ठीक कर सकती है। सास अपनी गरिमा को ध्यान में रखते हुए अपनी बहु को बेटी तुल्य समझकर घर की रीति नीति के अनुरूप ढलने का प्रयत्न करें और प्यार , दुलार व मधुर व्यवहार से बहु को अपना बनाए। इससे दोनों के रिश्तों में प्रगाढ़ता आएगी। अपने घर को रमणीय बनाना हर बहु को भी अपनी सास को मान व सम्मान देना चाहिए। सास को अपनी माँ तुल्य माने ताकि पराएपन का अहसास ही न हो साध्वी श्रीजी ने साधु की भिक्षाचर्या के बारे में भी अवगत दी। साध्वी श्री मंगलप्रज्ञा जी अपने उदबोधन में कहा रिश्तों की दुनिया में सास बहु का रिश्ता बहुत महत्वपूर्ण है।
सास बहु दोनों के भीतर प्रमोद भावना का विकास होना चाहिए । दोनों को एक दूसरे के गुणों को व्यक्त करें ताकि रिश्तों में प्रगाढ़ता बनी रहे । दोनों की सोच सकारात्मक बने । अगर जिंदगी भर कांटे ही कांटे देखते रहे तो फूल का अहसास करा सकती है अगर ये दोनों गुण सास बहु में आ जाए तो घर परिवार का वातावरण रसमय बन सकता है। संबंधो में मधुरता आ सकती है।
राष्ट्रीय अध्यक्षा कुमुद कच्छारा ने अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा आज का यह मनभावन दृश्य देखकर मेरा मन गदगद है एवं में नतमस्तक हु साध्वी श्रीजी के प्रति जिनकी प्रेरणा से यह विराट उपस्थिति दृग्गोचर हो रही है। साध्वी श्रीजी के प्रति जिनकी प्रेरणा से यह विराट उपस्थिति दृग्गोचर हो रही है। साध्वी श्रीजी के प्रभावशाली आभामण्डल से ऊर्जा के स्फुलिंग स्फुरित होते है। आपका मार्गदर्शन महिला शक्ति में नए जोश का संचार करता है। सास बहु का यह रिश्ता सुखदाई न वरदाई बने ऐसी मैं मंगलकामना करती हूं।
सावित्री कोचर ने हास्य कविताओं के माध्यम से सम्मेलन को रोचकता प्रदान की। रीटा मकवाना ने सास बहु के रिश्तों में टॉक व फ्रेंडशिप की बात कही । जयश्री बड़ाला ने ब्यूटी फूल रिश्तों को बनाने के लिए एक एक बर्ड की व्याख्या की। गुंजन सुराणा ने स्वागत भाषण दिया। साध्वी कर्णिका श्रीजी , साध्वी सुधाप्रभाजी, साध्वी स्मतव्यशाजी , व साध्वी मैत्रीप्रभाजी ने हैप्पी होम में रहना सुहाना लगता है , गीत का भावपूर्ण संगान किया। रेखा , रेखा सविता व संगीता , निमजा ने प्राप्त बहु की रोचक नाटिका प्रस्तुत की। संचालन भावना वन्दना वागरेचा ने किया। प्रायोजक परिवार मांगीदेवी ढेलडिय़ा, ममता दिलीप ढेलडिय़ा, सुमन महावीर ढेलडिय़ा, का सम्मान किया गया। लतिका डागलिया, भावना वंदना वागरेचा, गुंजन सुराणा साधना मेहता, चंद्रा चपलोत, शर्मिला चपलोत, जया धाकड़, रेखा बरलोटा, पुष्पा कच्छारा, रेखा बरलोटा, प्रीति बोथरा, हेमलता सोनी आदि बहनो का कार्यक्रम की सफलता में सराहनीय सहयोग रहा । यह जानकारी मीडिया प्रभारी नितेश धाकड़ ने दी।

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