व्यवहार कुशलता व सहिष्णुता है सज्जनता का गुण : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण

  • 159वें मर्यादा महोत्सव के मंगल प्रवेश से पूर्व महातपस्वी महाश्रमण पहुंचे पुराना गांव बायतू
  • आचार्यश्री ने समुपस्थित श्रद्धालुओं को बताए सज्जनता के गुण

24.01.2023, मंगलवार, पुराना गांव बायतू, बाड़मेर (राजस्थान)। जन-जन को सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का संदेश देने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मंगलवार को हेमजी का तला गांव से प्रातःकाल गतिमान हुए। आज भी आसमान में भी छाए बादलों के कारण सर्दी अपना प्रभाव बनाए हुए थी। वहीं तीव्र रूप में बहती हवा सर्दी को और बढ़ा रही थी। बाड़मेर के इस सुदूर क्षेत्र में तेरापंथ धर्मसंघ के 159वें मर्यादा महोत्सव की समायोजना हो रही है। आचार्यश्री की दिन-प्रतिदिन बढ़ती बायतू से निकटता श्रद्धालुओं के उत्साह को बढ़ा रही थी। बायतू के उत्साही श्रद्धालु मार्ग में आचार्यश्री के दर्शन कर आशीष प्राप्त कर रहे थे। सर्द मौसम में लगभग 8 किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री अपनी धवल सेना संग पुराना गांव बायतू में स्थित महात्मा गांधी गवर्नमेंट स्कूल में पधारे। स्वागत जुलूस के साथ आचार्यश्री स्कूल प्रांगण में पधारे तो स्कूल प्रबन्धन से जुड़े लोगों ने भी आचार्यश्री का भावभीना अभिनंदन किया।
स्कूल परिसर में बने सभागार में आयोजित मंगल प्रवचन कार्यक्रम में समुपस्थित श्रद्धालुओं को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि जीवन जीना सामान्य बात होती है, क्योंकि जीवन तो अन्य प्राणी भी जीते हैं। अपने जीवन को विशिष्ट बनाने के लिए सज्जनता के गुणों को अपने जीवन में धारण करने का प्रयास करना चाहिए। सज्जन का प्रथम गुण होता है कि वह दूसरों की निंदा नहीं करता, बल्कि वह दूसरे के गुणों का बखान कर सकता है। दूसरों के धन के विकास से ईर्ष्या नहीं, बल्कि उसके भीतर संतोष का भाव हो, यह सज्जनता का दूसरा गुण है। दूसरों की तकलीफों में संवेदना व्यक्त करने वाला हो, स्वयं की बड़ाई नहीं करना, नीति को नहीं छोड़ना, उचित का लंघन नहीं करना, अप्रियता की स्थिति में भी सहिष्णुता और शांति को बनाए रखना सज्जनता के गुण हैं। इन गुणों का आदमी अपने जीवन में विकास करे तो जीवन विशिष्ट हो सकता है। इसके साथ दया और अनुकंपा की भावना हो तो आत्मा कल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
अमेरिका में लम्बा प्रवास कर गुरुदर्शन करने वाली समणी नीतिप्रज्ञाजी व समणी मलयप्रज्ञाजी ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री के स्वागत में श्री तन्मय छाजेड़, श्रीमती सोनू छाजेड़, श्रीमती जशोदा छाजेड़, श्री भंवरलाल बालड़, विद्यालय के प्रिंसिपल श्री अतरसिंह यादव ने अपनी श्रद्धासिक्त अभिव्यक्ति दी। श्रीमती राधा बालड़, सुश्री रविना लोढ़ा व साध्वी मार्दवयशाजी के परिजनों ने अपने-अपने गीतों का संगान किया। तेरापंथ कन्या मण्डल-बायतू की कन्याओं ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी।

26-28 जनवरी को आयोजित होगा 159वां मर्यादा महोत्सव
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता की मंगल सन्निधि में 26 जनवरी से तेरापंथ धर्मसंघ के 159वां मर्यादा महोत्सव का शुभारम्भ होगा। 28 जनवरी तक चलने वाले तेरापंथ धर्मसंघ के सबसे बड़े महोत्सव में देश-विदेश से श्रद्धालुओं की उपस्थिति होगी। इसके लिए बायतूवासियों में अपार उत्साह देखने को मिल रहा है।

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