महातपस्वी महाश्रमण ने ज्ञान, दर्शन और चारित्र में प्रवर्धमान बनने की दी प्रेरणा 

  • वर्धमान महोत्सव का द्वितीय दिवस, मुख्यमुनिश्री व साध्वीवर्याजी ने जनता को किया उद्बोधित
  • चारित्रात्माओं व श्रद्धालुओं ने दी अपनी-अपनी अभिव्यक्तियां
  • आचार्यश्री ने वर्धमान आदर्श विद्या मंदिर के विद्यार्थियों को दी पावन प्रेरणा

10.01.2023, मंगलवार, बालोतरा, बाड़मेर (राजस्थान)। मंगलवार को वर्धमान महोत्सव का मध्य दिवस। वर्धमान आदर्श विद्या मंदिर के प्रांगण में बना वर्धमान महोत्सव का विशाल प्रवचन पण्डाल। पण्डाल में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ के मध्य बने मंच पर सुशोभित तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान गणराज, भगवान वर्धमान के प्रतिनिधि, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने चतुर्विध धर्मसंघ को ज्ञान, दर्शन और चारित्र में प्रवर्धमान बनने की पावन प्रेरणा प्रदान की। मध्य दिवस के मौके पर मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी व साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी ने भी जनता को उद्बोधित किया। तो वहीं चारित्रात्माओं व श्रद्धालुओं ने भी अपनी-अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। वर्धमान महोत्सव का ऐसा सुन्दर दृश्य देख बालोतरा का जन-जन पुलकित और प्रमुदित नजर आ रहा था।
बालोतरा में चार दिवसीय प्रवास के दौरान आयोजित वर्धमान महोत्सव ने मानों पूरे बालोतरा में धार्मिकता, आस्था और निष्ठा को प्रवर्धमान बनाए हुए है। आचार्यश्री के श्रीमुख से प्रातःकाल मंगलपाठ का श्रवण करने से लेकर, मंगल प्रवचन के पश्चात भी देर रात आचार्यश्री का प्रवास स्थल पूरी तरह श्रद्धालुओं की उपस्थिति से जनाकीर्ण से बना हुआ है। मानों बालोतरा का जन-जन इस अवसर पूर्ण लाभ उठाने को तत्पर नजर आ रहा है।
मंगलवार को आचार्यश्री के वर्धमान महोत्सव के पधारने से पूर्व ही विशाल प्रवचन पण्डाल भी मानों जनता की विराट उपस्थिति से छोटा प्रतीत हो रहा था। आचार्यश्री पधारे तो पूरा वातावरण ‘वन्दे गुरुवरम्’ के घोष गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ आज के कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम में सर्वप्रथम मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी तथा साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने जनता को उद्बोधित किया। तदुपरान्त युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने जनता को अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि आज वर्धमान महोत्सव का मध्य दिवस है। जीवन में वर्धमानता अभिष्ट हो, इसके लिए उस दिशा में पुरुषार्थ भी वांछनीय है। ज्ञान प्राप्ति की दिशा सही हो। सम्यक् ज्ञान हो फिर सम्यक् दर्शन प्रवर्धमान बने और जब वह सम्यक् ज्ञान चरित्र मंे उतरकर चारित्र को सम्यक् बनाए और सम्यक् चारित्र भी वर्धमान बने तो पूर्णता की बात हो सकती है। कषाय की मंदता और देव, गुरु और धर्म के प्रति श्रद्धा व निष्ठा हो और चरित्र निर्मल बने। चारित्र को निर्मल बनाने के लिए प्रतिक्रमण अच्छा और दोषों की आलोयणा और प्रायश्चित्त अच्छा हो तो शुद्धता की बात हो सकती है।
आचार्यश्री की अनुज्ञा से बहिर्विहार से गुरुकुल में पहुंची साध्वियों व समणियों ने साधुओं को सविधि वंदन कर खमतखामणा की। संतों की ओर से मुनि धर्मरुचिजी ने उनके प्रति मंगलकामना की। साध्वीवृंद ने वर्धमान महोत्सव के संदर्भ में गीत का संगान किया। मुमुक्षु राजुल खटेड़ ने अपने समस्त परिजनों के साथ स्वागत गीत का संगान किया। कमिश्नर श्री अशोक कोठारी ने संकल्प से संबंधित बात आचार्यश्री के समक्ष बात रखी तो आचार्यश्री ने इच्छुक लोगों को धारणा अनुसार संकल्प कराया। तेरापंथ युवक परिषद और तेरापंथ किशोर मण्डल के सदस्यों ने गीत का संगान किया। वर्धमान स्कूल व स्थानकवासी संघ की ओर से श्री ओम बांठिया, स्थानीय अणुव्रत समिति के अध्यक्ष श्री जवेरी सालेचा व तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम की ओर श्री पवन बांठिया ने अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ कन्या मण्डल की कन्याओं ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के उपरान्त आचार्यश्री वर्धमान आदर्श विद्या मंदिर के दूसरी ओर उपस्थित विद्यार्थियों के मध्य पधारे और विद्यार्थियों को भी पावन प्रेरणा प्रदान की।

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