मुम्बई में विज्ञान और अध्यात्म पर सेमिनार

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मुम्बई: रविवार को “धर्म और विज्ञान” भविष्य में कैसे समाज के लिए वरदान साबित होंगे, इस विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन इंटरनेशनल अहिंसा रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ऑफ स्प्रिचुवल टेक्नोलॉजी द्वारा वर्ल्ड जैन कन्फेडरेशन, आई.आई.टी. बॉम्बे, बी. एम. आई. आर. सी, जैन विश्व भारती लाडनूं के सहयोग से मुम्बई के भारतीय विद्याभवन में प्रोफेसर मुनि महेंद्र कुमारजी, आचार्य नंदीघोष सूरीजी एवं प्रोफेसर समणी चैतन्यप्रज्ञा के सानिध्य में संपन्न हुआ।
सेमिनार में 2016 में भगवान महावीर अंतरराष्ट्रीय शोध केंद्र द्वारा “जैनदर्शन और विज्ञान” विषय पर आई.आई.टी. बॉम्बे में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस, जिसमें 17 देशों ने भाग लिया था, की पुस्तक का विमोचन देश-विदेश के वैज्ञानिकों, विद्वानों और जैन समाज के गणमान्य लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पुस्तक विमोचन के दौरान डॉक्टर मुनि अभिजीतकुमार ने कहा कि विज्ञान और धर्म के एक साथ आने से जीवन सुगम होगा। उन्होंने कहा कि पुस्तक केवल पड़ी न रहे बल्कि पढ़ी हुई होनी चाहिए।
सेमिनार में जस्टिस तातेड़ ने कहा कि धर्म जब विज्ञान के पटल पर सिद्ध होता है तभी उसे समाज स्वीकारता है। प्रोफेसर नरेंद्र भंडारी ने कहा कि भगवान महावीर ने हजारों वर्ष पहले ह्यूमन साइंस की नींव रखी थी। उन्होंने जिन सिद्धान्तों को दिया, उन्हें आज विज्ञान मान रहा है। न्यूरोलॉजिस्ट प्रताप संचेती ने कहा कि अहिंसा रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ऑफ स्प्रिचुवल टेक्नोलॉजी धर्म और विज्ञान को जोड़ने वाली नवोदित संस्था है। यह प्रोफेसर महेंद्र कुमार का ब्रेन चाईल्ड है। प्रो. समणी चैतन्यप्रज्ञा ने कहा कि जैन धर्म विज्ञान के पटल पर लगातार एक उचित स्थान प्राप्त करता जा रहा है। डॉक्टर बिपिन दोषी, रोजी ब्लू फाउंडेशन के अध्यक्ष अरुण मेहता, लाहेरी गुरुजी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। गुरुजी ने कहा कि अध्यात्म और विज्ञान दो चीज़ नहीं है। आंतरिक जगत को संचालित करने के लिए अध्यात्म की आवश्यकता है और बाह्य जगत को संचालित करने के लिए विज्ञान की आवश्यकता है।
आचार्य नंदीघोष सूरीजी ने कहा कि मुनि महेंद्र कुमारजी की पुस्तकों से मुझे प्रेरणा मिली। करीब 35 वर्ष पहले उनकी किताब पढ़ी थी, उसके बाद ही मेरे जीवन मे बदलाव आया और जब तीन साल पहले उनसे साक्षात मुलाकात हुई तो उनके व्यक्तित्व से काफी प्रभावित हुआ।
इस अवसर पर प्रोफेसर के.पी. मिश्रा, भंवरलाल कर्णावट, सिरियारी संस्थान अध्यक्ष ख्यालीलाल तातेड़, तेरापंथी सभा मुंबई के अध्यक्ष नरेंद्र तातेड़, विमल सोनी, गणपत डागलिया, राजकुमार चपलोत, राजेश चौधरी, महेंद्र तातेड़, प्रकाश धींग, मुकेश धाकड़, विजय पटवारी, नितेश धाकड़, हेमेंद्र जैन, चन्द्रप्रकाश मादरेचा, सुनील इंटोदिया, दिनेश धाकड़, कुलदीप बैद, सी.ए. कमलेश रांका, वी.सी. कोठारी आदि की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुवात नवकार महामंत्र के साथ हुई। मंगलाचरण गीतिका की प्रस्तुति पीयूष नाहटा ने दी। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष सहयोग नवरत्न गन्ना, सुमेर सुराणा, एस के जैन, प्रवीण धारीवाल, अशोक कोठारी, पूजा बांठिया का रहा। कार्यक्रम में संचालन मुनि अभिजीतकुमारजी और वर्षा बैद ने किया। अंत में कार्यक्रम के उपरांत धन्यवाद ज्ञापन वर्ल्ड जैन कन्फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष विमल कोठारीजी ने किया।
सेमिनार के आयोजन और कांफ्रेंस की पुस्तक के प्रकाशन में वर्ल्ड जैन कन्फेडरेशन और रोजी ग्रुप कंपनी का पूर्ण आर्थिक योगदान रहा।

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