फिल्म रिव्यू: ज़िंदगी को जीना सिखाती है “लाइफ इज गुड”

कलाकार: जैकी श्रॉफ, रंजीत कपूर, दर्शन जरीवाला, मोहन कपूर, सुनीता छाया, सान्या अंकलेसरिया, अनन्या विज, अंकिता श्रीवास्तव, सानंद वर्मा व अन्य

निर्देशक: अनंत नारायण महादेवन, म्यूजिक: अभिषेक राय

जैकी श्रॉफ की मुख्य भूमिका वाली फिल्म “लाइफ इज गुड” बदलती परिस्थितियों के बीच जीना सिखाती है। फिल्म इस बात को कहने में बखूबी सफल हुई है कि किसी का जाना तकलीफदेह तो है, लेकिन सबकुछ खत्म नहीं हो जाता। हमारे आस पास बहुत से लोग हैं, जिनके प्रेम, वात्सल्य से हमारी ज़िंदगी के मायने बदल सकते हैं, बस जरूरत है उन्हें समझने की।

कहानी: कहानी की शुरुआत में एक अधेड व्यक्ति रामेश्वर (जैकी श्रॉफ) एक नाव में बैठकर सोच में डूबे रहते हैं। एक अन्य सीन में उन्हें उनके दफ़्तर यानि पोस्ट ऑफिस में सीनियर अधिकारी (रंजीत कपूर) फटकारते हुए कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि अकेले तुम्हारी मां ने ही साथ छोड़ा है। जिस पर रामेश्वर जवाब देते हुए पूछते हैं कि सर आपकी मां तो हैं ना, ऑफिसर कहते हैं ‘हां’, इस पर रामेश्वर कहते हैं फिर आप नहीं समझेंगे। कहानी आगे बढ़ती है, रामेश्वर अपने घर पहुँचते हैं और ड्रॉवर से पॉइजन की शीशी निकालकर उसे खाने ही वाले होते हैं कि खिड़की पर एक बॉल आकर लगता है और खिड़की का कांच टूटकर घर में बिखर जाता है। सामने से एक मासूम सी बच्ची (मिष्टी) की आवाज़ आती है, अंकल मेरी बॉल देंगे या बाकी लोगों की तरह आप भी डाटेंगे? इसी बीच मिष्टी की मौसी आती है, दोनों रामेश्वर के घर में जाकर माफ़ी मांगते हैं और घर में बिखरा कांच का टुकड़ा रामेश्वर के मना करने के बावजूद उसकी मौसी साफ करती है। मिष्टी रामेश्वर की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाती है। कहानी आगे बढ़ती है, मिष्टी बड़ी होती है, बीच में कई फनी मोमेंट भी आते हैं, लेकिन एक बार फिर रामेश्वर के जीवन में उदासी आती है। जिसके बाद एक बार फिर उन्हें उम्मीद दिखती है। इसी कहानी को आगे बढ़ाती हुई फिल्म “लाइफ इज गुड” अपनी बात सहज तरीके से कहने में कितनी सफल होती है, इसे जानने के लिए एक बार फिल्म को जरूर देखें। आज के दौर में जब जिंदगी जीना एक चुनौती बनती जा रही है, आत्महत्या जैसी घटनाएं अक्सर सुनने में आ रही हों, तो इस दौर में “लाइफ इज गुड” एक रास्ता जरूर दिखाती है।

अभिनय: जैकी श्रॉफ रामेश्वर की भूमिका में खुद को बखूबी ढाला है जबकि मिष्टी की भूमिका में अनन्या विज व दो अन्य कलाकारों ने भी अपना किरदार बढ़िया किया है। रंजीत कपूर ने पोस्ट ऑफिस के सीनियर अधिकारी के रूप में अच्छे लगे हैं तो वहीं मोहन कपूर, दर्शन जरीवाला, सुनीता चाया, सान्या अंकलेसरिया, अनन्या विज, अंकिता श्रीवास्तव, सानंद वर्मा आदि कलाकारों ने भी अपने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।

फिल्म के निर्देशक अनंत नारायण महादेवन हैं, उन्होंने फिल्म के हर सीन पर काफी मेहनत की है। लोकेशन का चुनाव भी काफी अच्छा है। अंतिम सीन तक दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब हुए हैं।

म्यूजिक: अभिषेक राय का म्यूजिक ठीक ठाक है।

कुल मिलाकर ऐसे दौर में एक अच्छी फिल्म जो जिंदगी की निराशा में आशा दिखाती है। एक बार जरूर देखें।

सुरभि सलोनी की तरफ से फिल्म “लाइफ इज गुड” को 4 स्टार

  • दिनेश कुमार

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