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देवभूमि से बही ‘साहित्य गंगा’

  • के.सी. महाविद्यालय में साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन

मुंबई। दक्षिण मुंबई स्थित के.सी. महाविद्यालय में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों से उत्तराखंड जीवंत हो उठा। अवसर था हिन्दी-विभाग द्वारा आयोजित साहित्य गंगा के द्वितीय सोपान का। कार्यक्रम के शुभारंभ में विद्यार्थियों ने नृत्य एवं गीत के माध्यम से देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक गंगा को कुछ यूं बहाया कि सागर किनारे स्थित यह मायानगरी सराबोर हो गई। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात एचएनसी विवि. की कुलपति तथा के.सी. कॉलेज की प्राचार्य डॉ. हेमलता बागला ने हिन्दी –विभाग के इस प्रयास की सराहना की तथा भविष्य में इस प्रकार के आयोजन करते रहने की बात कही।
उत्तराखंड केंद्रीत इस ‘साहित्य गंगा’ समारोह के मुख्य अतिथि तथा नवभारत टाइम्स के संपादक सुंदरचंद ठाकुर ने विद्यार्थियों को उद्बोधित करते हुए संस्कृति एवं संस्कार से जुड़े रहने तथा अपने सपनों को साकार करने के लिए सतत रूप से प्रयास करने की प्रेरणा दी। श्री ठाकुर ने कहा कि जब आप सोते – जागते, उठते-बैठते हर समय अपने सपने के बारे में सोचना शुरू कर देंगे तो तय मानिए आपको इच्छित सफलता प्राप्त होकर ही रहेगी। उन्होंने इस बात को अपनी जीवन यात्रा के माध्यम से विद्यार्थियों को समझाया भी। इतना ही नहीं श्री ठाकुर ने उत्तराखंड की स्थानीय भाषा में कविता का पाठ एवं उसकी व्याख्या कर कार्यक्रम की गरिमा में गुणोत्तर वृद्धि कर दी। श्री ठाकुर ने बौद्धिक विकास के लिए स्वस्थ शरीर की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के निवर्तमान कार्याध्यक्ष डॉ. शीतला प्रसाद दुबे ने ‘साहित्य गंगा’ जैसे कार्यक्रमों को आज की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि विद्यार्थी अपनी भाषा, अपनी सस्कृति, अपने संस्कार को जाने समझो तथा उसका सम्मान करें। हिन्दी-विभाग इसके लिए साधुवाद का पात्र है कि उसने ऐसे कार्यक्रम की संकल्पना की है, जिसमें विद्यार्थियों के माध्यम से भारत के विविध क्षेत्रों की संस्कृति एवं साहित्य को प्रस्तुत किया जा रहा है। वहीं प्रत्येक सोपान में किसी एक राज्य को प्रमुखता देने से विद्यार्थी वहां की संस्कृति एवं भाषा के बारे में काफी कुछ जान सकेंगे।
के.सी. महाविद्यालय के प्राचार्य स्मरजीत पाधी ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक साहित्यिक कार्यक्रमों से युवा वर्ग को भारत के विभिन्न प्रांतों की संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है, वहीं परिवर्तनात्मक सोच का विकास होता है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह आज का कार्यक्रम उत्तराखंड को केंद्र में रखकर किया गया है, उसी तरह एक दिन उनकी जन्मभूमि उड़ीसा को केंद्र में रखकर भी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. राजेश्वर उनियाल ने पौराणिक एवं ऐतिहासिक प्रसंगों के माध्यम से विद्यार्थियों को उत्तराखंड के गौरव का दिग्दर्शन कराया। कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. अजीत कुमार राय ने ‘साहित्य-गंगा’ के आयोजन एवं उसकी संकल्पना पर प्रकाश डाला तथा समापन के समय बताया कि ‘साहित्य गंगा’ के ‘तृतीय सोपान’ का आयोजन जनवरी माह में किया जाएगा तथा उसमें ‘राजस्थान की संस्कृति’ केंद्र में रहेगी। कार्यक्रम का संचालन रिया सिंह, प्रीति परमार, मधु चौधरी, आशा गुप्ता, संस्कृति सिंह एवं प्रिया मिश्रा ने तथा आभार ज्ञापन डॉ. सुधीर कुमार चौबे एवं भाग्यश्री कच्छारा ने किया।

उपाधि पाकर खिले चेहरे
कार्यक्रम के दौरान स्नातकोत्तर (एम.ए.) एवं बी.ए. तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को उपस्थित गणमान्यों द्वारा उपाधि प्रदान की गई। कोरोना महामारी के चलते लगे लॉकडाउन के चलते इन विद्यार्थियों का दीक्षांत समारोह नहीं हो पाया था। साहित्य गंगा समारोह के दौरान विभाग के प्रयास से आयोजित दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त कर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे।

रंगारंग प्रस्तुतियों ने समां बांधा
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। शिल्पा परमाणिक द्वारा गणेश वंदना पर प्रस्तुत नृत्य ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। वहीं यशिका बिष्ट, मीनाक्षी नाइक, दृष्टि सिंह द्वारा प्रस्तुत सामूहिक नृत्य ने मुंबई में उत्तराखंड का जीवंत कर दिया। इसी क्रम में मधु चौधरी, वैशाली संकलेचा ने अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरमं पर, सृष्टि भाटिया ने माई भवानी तथा आंकाक्षा ओझा ने घर मोरे परदेसिया गीत पर तथा सिमिन कुरैशी, सृष्टि भाटिया एवं दर्श संकलेचा ने एकल नृत्य प्रस्तुत किया। इसके अलावा पल्लवी जायसवाल, श्रेया, राहुल राठौर ने गीत तथा श्वेता मिश्रा, सिमिन कुरैशी, मैत्री शाह, सेजल पाल, मेघा दोडिया, संस्कृति सिंह ने कविता पाठ किया। वहीं खुशी शाडीज एवं मेहुल वाघेला ने कहानी पाठ किया।

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