सभी तबकों के लिए अलग – अलग तय हो घरेलू रसोई गैस की कीमतें !

किसी भी देश का सर्वांगीण विकास तभी हो सकता है जब उस देश के नागरिकों की आवश्यकता के अनुरूप सभी तबकों के लोगों के लिए कार्य योजनाए चलाकर उनका विकास किया जाय।  यह देश के लिए इसलिए भी अति आवश्यक है, क्योंकि अधिकांश आबादी न केवल गावों में रहती है, बल्कि मुख्य धारा से अभी भी दशकों दूर है।  विकास के नाम पर एंड्राइड फ़ोन और इन्टरनेट कनेक्शन की पहुँच जरुर अधिकांश जन तक हुई है।  जिसके लाभ के रूप में लोग मनोरंजक विडियो देखना, सोशल मीडिया कंटेंट शेयर करना और सोशल मीडिया पर अपनी फोटो/प्रतिक्रिया दर्ज करके समय व्यतीत कर रहें है।  हालाँकि वर्ष 2014 में मोदी सरकार को केंद्र की सत्ता में आने के पश्चात् एक दो नहीं बल्कि अनेकों योजनाए आम जन को केंद्र में रख कर चलायी जा रही है।  जिसका लाभ भी आम जन को मिलता दिखाई पड़ रहा है।  बीतें 7 वर्षो से अधिक समय में अधिकांश ग्रामीण आबादी को अब न केवल योजनाओं का नाम और नियम याद है, बल्कि सीधे लाभ भी मिल रहा है।  पर कुछ बिंदु और बातें ऐसी भी है जिसके विषय में सरकार को न केवल सोचने की, बल्कि त्वरित रूप से कार्य करने की जरूरत है।  उन्ही में से एक है – “प्रत्येक वर्ग को ध्यान में रखकर रसोई गैस का मूल्य निर्धारण”।  इस पर पुनः नए सिरे से सोचने की आवश्यकता है।
रसोई गैस की कीमत भले ही अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्थाओं पर निर्भर करती हो, पर आम जन की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु सरकार को कुछ बड़े बदलाव करने की भी जरूरत है, क्योंकि सभी के बजट में रसोई गैस हो यह जमीनी आवश्यकताओं में से एक है।  प्रत्येक परिवार की जमीनी जरूरतों में प्रमुख रूप से रसोई गैस शामिल है, जबकि कुछ लोगों की आमदनी अधिक हो सकती है, कुछ की कम या कुछ लोगों की कोई आमदनी नहीं होती, फिर भी रसोई गैस का मूल्य लगभग सभी को सामान रूप से भुगतान करना पड़ रहा है।  रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी अब नाममात्र ही रह गयी है।  सितम्बर 2016 में रसोई गैस की कीमत 467 रूपये थी वर्तमान में मूल्य लगभग रुपया 1000 से अधिक है।  यदि देखा जाए तो नवम्बर 2020 से मई 2022 के मध्य घरेलु गैस की कीमतों में रूपये 400 से अधिक वृद्धि हुई है।  इस तेजी से मूल्य वृद्धि के कारणों का आकलन किया जाए तो आपको दो प्रमुख कारण दिखेगे – 1. घरेलु गैस पर दी जाने वाली सब्सिडी धनराशी में तेजी से कमी आयी है जिसे सीधे ग्राहकों को बैंक खाते में वर्ष 2015 से हस्तांतरण करना प्रारम्भ किया गया है 2. अंतर्राष्ट्रीय स्थितियां ऐसी रही है की इनके मूल्य में तेजी से वृद्धि हुई है (रूस युक्रेन युद्ध)|
जब भी मूल्य वृद्धि होती है तो उसका प्रभाव कई तबकों पर बेहद नकारात्मक पड़ता है।  राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) की वर्ष 2019-21 की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार – रसोई गैस में तेजी से मूल्य वृद्धि होने की वजह से मात्र 60 प्रतिशत घरों में ही खाना पकाने के लिए स्वच्छ खाना पकाने (बिजली, एलपीजी/प्राकृतिक गैस, बायो गैस इत्यादि) के विकल्पों का उपयोग किया जा रहा है।  जबकि 40 प्रतिशत आबादी खाना पकाने के लिए अन्य विकल्पों का प्रयोग कर रही है जो उनके लिए व्यावहारिक नहीं है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी नुकशान दायक है।  यहाँ समझने वाली बात यह भी है की विश्व बैंक विकास संकेतको के संग्रह की 2020 आकड़ों के अनुसार देश की कुल आबादी का 65.07 प्रतिशत हिस्सा गावों में रहता है।  स्वच्छ खाना पकाने के विकल्पों के विपरीत अन्य उपलब्ध विकल्पों का प्रयोग कर खाना पकाने में कुल 55% ग्रामीण घर शामिल है।  जहाँ आय की असामनता, न्यूनतम स्तर, अस्थिरता सर्वाधिक है।  ग्रामीण क्षेत्र में मात्र 45 प्रतिशत घरों में ही स्वच्छ खाना पकाने के विकल्पों का प्रयोग किया जा रहा है।  जबकि मौजूदा परिस्थिति में लगभग देश में 99.8% घरों के पास में रसोई गैस कनेक्शन है।  घरेलु गैस के दामों में तेजी से वृद्धि, सब्सिडी का न होना या नाम मात्र होने की वजह से उपयोग में कमी आयी है।  मई 2020 में दिल्ली में घरेलू गैस पर सब्सिडी समाप्त कर दी गयी, वहां आज तकरीबन रुपया 1000 मूल्य है, जिसे सभी तबके के लोगों को रसोई गैस के एक सिलेंडर के लिए भुगतान करना पड़ रहा है।
सरकार जनता चुनती है और जनता के लिए सरकार कार्य करती है।  रोटी कपड़ा और मकान पर जिस सिद्दत से केंद्र सरकार कार्य कर रही है वह वास्तव में प्रशंसनीय है।  अभी उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में आम जन को वर्ष में दो बार रसोई गैस सिलेंडर फ्री देने की बात कही गयी है।  केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना ने घर – घर दस्तक दे कर आम लोगो के पास रसोई गैस पहुँचायी है।  अब जरूरत है की केंद्र सरकार रसोई गैस उपभोक्ताओं में श्रेणियों का निर्धारण करें मसलन – गरीबी रेखा से निचे जीवन यापन करने वाले लोगों को वर्ष में 6 रसोई गैस सिलेंडर फ्री दिया जाय।  दूसरा तीन लाख तक की वार्षिक आमदनी की आबादी के लोगों को बाजार दर से 30% कम मूल्य पर रसोई गैस उपलब्ध करायी जाय।  3 लाख से अधिक पर 7 लाख से कम की आमदनी की आबादी को बाजार मूल्य पर रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराये जाय तथा जिनकी वार्षिक आमदनी 7 लाख या इससे अधिक है उन्हें बाजार मूल्य से 30% अधिक दर पर रसोई गैस उपलब्ध करायी जाय।  ऐसा इसलिए जरुरी है की सभी तबके के लोगो पर उनकी आय के अनुरूप भार पड़ सकें।  जमीनी आवश्यकताओं की पूर्ति और आम जन को सहूलियत प्रदान करने के लिए सरकार को इस विकल्प पर विचार करके कार्यवाही करनी चाहिए।  आम जीवन का विकास और बदलाव के लिए यह कार्य करना बेहद जरुरी है तभी वास्तव में सबका साथ और सबका विकास की प्रतिबध्दता पूरी हो सकेगी।

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