‘अच्छे दिन’ की बात भूल मंदिर-मूर्ति की चर्चा कर रही सरकार: चिदंबरम

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कोलकाता: नोटबंदी के दो साल पूरे होने के मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से फेक मनी खत्म नहीं हुई बल्कि जाली नोट बनाने वालों ने 2,000 और 5,00 रुपये के नए नोटों की भी फेक मनी तैयार कर ली। नोटबंदी के समय अमान्य किए गए सभी 99.3% नोट वापस आरबीआई के पास आ गए। उन्होंने कहा कि वास्तव में सभी अमान्य नोटों को बैंक काउंटर पर एक्सचेंज किया गया। उन्होंने नोटबंदी को सरकार की ओर से लॉन्च की गई मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम बताया। यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चिदंबरम ने कहा कि यह सरकार अब अच्छे दिन की बात नहीं करती, अब विकास, नौकरियों, निवेश, ज्यादा आय या ग्रोथ की भी कहीं चर्चा नहीं है।
उन्होंने कहा कि आजकल हम जो भी चर्चा सुनते हैं वह केवल हिंदुत्व का अजेंडा है। चुनाव के ठीक बाद प्रधानमंत्री ने देश से सभी विवादित और विभाजनकारी मुद्दों को भूल विकास पर फोकस करने की अपील की थी। आज विकास या अच्छे दिन का वादा भुलाया जा सकता है। प्रधानमंत्री खुद विवादित मुद्दों को हवा देते हैं। आरएसएस, मंत्री से लेकर बीजेपी के नेता सभी विभाजनकारी मुद्दों पर बातें कर रहे हैं और लिख रहे हैं।
उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि इस बात पर कोई संदेह नहीं है कि देश की जनता ऐसे विकास पर गौर करेगी और जब उसे मौका मिलेगा वह उचित जवाब देगी। पूर्व वित्त मंत्री ने आगे कहा कि हाल में कर्नाटक में लोगों को मौका मिला था और उन्होंने कांग्रेस-जेडीएस के पक्ष में वोट किया। उसके बाद उपचुनावों में बीजेपी को तगड़ा झटका लगा। अब बीजेपी और आरएसएस के लोग हिंदुत्व के अजेंडे को हवा दे रहे हैं। अगले कुछ हफ्ते काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
मूर्ति पर कहा, सरकार फेल
एक सवाल के जवाब में चिदंबरम ने कहा कि साढ़े चार साल पहले उन्होंने विकास, नौकरियों और ग्रोथ की बात की थी। उन्होंने इनमें से कुछ भी हासिल नहीं किया था। ऐसे में अब वे हिंदुत्व, विशाल मंदिर, भव्य मूर्तियों की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र मोदी सरकार पूरी तरह से फेल रही है।
आरबीआई विवाद पर भी बोले
उन्होंने कहा कि अगर आरबीआई से विवाद जारी रहता है या गवर्नर इस्तीफा देने को मजबूर होते हैं तो इसके परिणाम काफी भयानक होंगे। पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आरबीआई का बोर्ड किसी कंपनी की तरह नहीं है। केंद्रीय बैंक के अधिकार गवर्नर में निहित हैं। अगर सरकार की ओर से इसके खिलाफ कोशिश की जाती है तो इसके परिणाम खतरनाक होंगे।

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